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 रतलाम बीमार हो रहा है और डॉक्टर आराम फरमा रहे हैं।

BySurendra Jain

Oct 23, 2018

खबर पक्की: आपने कहावत सुनी होगी रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था वर्तमान में रतलाम के हालातों पर यह कहावत पूरी तरह फिट बैठ रही है। रतलाम बीमार हो रहा है और जिनको इलाज करना है वह आराम फरमा रहे हैं। डेंगू मलेरिया टाइफाइड और एलर्जी के हजारों हजार मरीज सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती है। सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी पैर धरने की जगह नहीं है लेकिन डॉ महापौर के नेतृत्व वाली नगर निगम के कर्ता-धर्ता अभी भी अफीम की गोली लेकर सोए हुए हैं। समस्या नासूर बन चुकी है लेकिन इनको कोई परवाह नहीं है। शहर में साफ सफाई और कीटनाशकों का छिड़काव बहुत ही दयनीय स्थिति में है। यही कारण है कि तमाम तरह के टैक्स देने के बावजूद जनता को नारकीय स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। अभी चुनाव आचार संहिता लगी हुई है। कलेक्टर को ऐसे निगमायुक्त जो कि पूरी तरह निष्क्रिय है की रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेज कर किसी अच्छे सक्रिय निगमायुक्त को यहां तैनात करवाना चाहिए। नहीं तो इनकी निष्क्रियता के कारण चुनाव में भी बहुत खलल पड़ेगा।

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