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धर्मांतरण के मामले में पुलिस ने परिजनों को बुलाकर पूछताछ की

ByHarish Sharma

May 24, 2017

धर्मांतरण की शंका पर 60 आदिवासी बच्चों मेमू ट्रेन से हिफाजत के साथ आरपीएफ पुलिस ने शनिवार देर रात चाइल्ड लाइन को सौंपने के बाद अब मामले को जीआरपी पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। जीआरपी पुलिस ने पूरे मामले की तफ्तीश शुरू करते हुए बच्चों के परिजनों को संदेश देकर उन्हें थाने बुलाकर उनके बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। वहीं मामले में रतलाम डीआई अविनाश शर्मा व एसपी अमित सिंह ने भी बच्चों के साथ पकड़ाए सात लोगों से आरपीएफ पुलिस व जीआरपी के साथ करीब दो घंटे से अधिक पूछताछ की है।

जीआरपी थाना प्रभारी अभिषेक गौतम ने बताया कि चाइल्ड लाइन की सूचना पर मेमू ट्रेन से आरपीएफ पुलिस ने करीब 60 बच्चों से पूछताछ करने पर संदेहास्पद जवाब के बाद संरक्षण में लेकर उनके साथ सात बड़े लोगों से पूछताछ शुरू की थी। बच्चों ने नाम व गोत्र हिंदू आदिवासी और झाबुआ जिले में मेघनगर इलाके का होना बताया था। लेकिन जबाव देते समय संकोच करते हुए जाति क्रिश्चयन होना बता रहें थे। वहीं उनके साथ केयरटेकर से भी संतुष्टी पूर्ण जवाब नहीं मिलने पर हिन्दू संगठन द्वारा धर्मांतरण का मामला होने के आरोप के बाद गहनता से जांच शुरू की गई थी। सभी बच्चों को संदेहास्पद स्थिति होने पर चाइल्ड लाइन के माध्यम से बाल कल्याण समिति के समक्ष सौंप दिया है। जिन्होंने उन्हें शेल्टर रूम भेज दिया है। जहां से उनके मां-बाप आने के बाद तस्दीक कर बच्चों को सुपुर्द किया जाएगा। वहीं थाने पर भी करीब 25 परिजन बच्चों के पहुंचे है। जिनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जिन्होंने अभी तक स्वयं की इच्छा से ही बच्चों को भेजना बताया है। उनका कहना था कि उन्होंने भी क्रिश्चयन धर्म अपना लिया है। बच्चे समर कैंप में जा रहे थे। उनका कहना है कि खाने-पीने के लिए उन्होंने खर्चा दिया था।

सात लोगों से पूछताछ शुरू
पुलिस ने बताया कि बच्चों को बस में लेकर जाने के दौरान हिरासत में मूलत: उड़ीसा हाल थांदला निवासी आमिया (46) पिता बार्बा जार्लो, मेघनगर निवासी विजय (18) पिता गौर सिंह मईड़ा, झाबुआ निवासी नितिन (19) पिता जोगडि़या मंडोल, पांगू (36) पिता वेस्ता वसुनिया, झाबुआ माधोपुर निवासी आकाश (18) पिता हटेसिंह गोंडिया, झाबुआ खरड़बडऱ्ी निवासी शर्मिला (19) पिता छगन डामोर, झाबुआ चमनाधामनी निवासी सविता (24) पिता पेमा भूरिया से पुलिस पूछताछ कर रही है। पूछताछ के दौरान एसपी के सामने शर्मिला ने बेहोशी का बहाना बनाया। जिसे पुलिस ने चिकित्सक बुलाकर दिखाया और उसे फिट बताया। सभी के बयान अलग-अलग है।

परिजन बोले स्वेच्छा से भेजा
पुलिस की सूचना पर पास्टर हटे सिंह गोंडिया करीब बच्चों के 25 परिजनों को जीप से लेकर जीआरपी थाने दोपहर पहुंचा। परिजनों में झाबुआ निवासी केरम पिता कलिया मचार, बामनिया गांव निवासी कमलेश पिता डूंगर सिंह, नंदगांव निवासी बाबू पिता झितरा अमलियार, नवापाड़ा निवासी कल्लू पिता कालिया भील ने बताया कि उन्होंने बच्चों को अपनी मर्जी से नागपुर इनके साथ भेजा था। उन्होंने क्रिश्चयन धर्म अपनायाा है। उन्हें पता नहीं है कि नागपुर कहां लेकर जा रहे थे। लेकिन समर कैंप में उनके बच्चों को ले जाया जा रहा था।

नोएडा से हुई बस किराए की फडिंग
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि थांदला निवासी पादरी आमिया जार्लो ने बताया कि वह मूलत: उड़ीसा का निवासी है। थांदला में पादरी है और संस्कार पब्लिक स्कूल में टीचर है। पास्टर ने जोधपुर से बस रतलाम से नागपुर के लिए 45 हजार में बुक कराई थी। उसे मेघनगर से ट्रेन मंें बच्चें एकत्रित कर रतलाम लाना था और यहां से बस द्वारा इंदौर होते हुए नागपुर जाना था। जहां पर समर कैंप आयोजित था। बच्चों को डांस, म्यूजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम कराना था। यह कैंप मिशन इंडिया नागपुर द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित होता है। बस की राशि का भुगतान ऑनलाइन डवलपमेंट सपोर्ट टीम के कॉर्डिनेटर अलकेश गणावा द्वारा की गई थी।

मामले में पूछताछ जारी है
आरपीएफ पुलिस ने संदिग्ध हालत में 28 लड़के और 32 लड़की सौंपी है। चाइल्ड लाइन की सूचना थी कि बिना परिजनों के उन्हें ले जाया जा रहा है। इस पर आरपीएफ ने पूछताछ में संदेहास्पद स्थिति होने पर बच्चों को संरक्षण में लेकर उनके साथ सात लोगों को हिरासत में लेकर जीआरपी को सौंपा है। मामले में पूछताछ जारी है। बच्चों के परिजनों को भी बुलाकर पूछताछ की जा रही है। अभी तक 25 परिजनों से यहां पहुंचे है। जिन्होंने मर्जी से भेजना बताया है। रतलाम से बस द्वारा बच्चे इंदौर होकर नागपुर ले जाने थे। दंदौर में कल्पेश भी इन्हें मिलना था। अभी यह नहीं बता पा रहे हैं कि नागपुर कहां लेकर जाना था। दो व्यक्ति के नाम दिए है, उनके मोबाइल भी बंद है। बच्चों को बालकल्याण समिति को सौंप दिया है। वहीं सातों लोगों से पूछताछ जारी है।
                                                                     – ध्रुव सिंह चौहान, डीएसपी जीआरपी रतलाम।

मामला संदेहास्पद है
अभी तक बच्चों के साथ सात लोग व्यस्क हिरासत में लिए हैं। जिनसे पूछताछ में सभी के बयान अलग-अलग प्राप्त हुए हैं। किसी ने प्रार्थना के लिए जाना तो किसी ने समर कैंप बताया है। वहां डांस, म्यूजिक सीखाने की बात कही है। वहीं कोई सेमीनार होना बता रहा है। अलग-अलग बयान से मामला संदेहास्पद लग रहा है। जिसके चलते जीआरपी को मामले में गहनता से जांच के लिए बोला है और बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंपने के लिए कहा है।

                                         – अमित सिंह एसपी रतलाम।

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