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ऐसे कार्य करें…जिंदगी के बाद भी जीवन बना रहे

ByHarish Sharma

May 24, 2017

रतलाम। जीवन में एक बार मौत होती है, परन्तु हम मौत के डर से हर दिन मर रहे हैं। मौत के भय ने जीवन को मार दिया है। जिन्दगी तो सांस खत्म होने के बाद खत्म हो जाती है, लेकिन मौत के बाद भी जीवन बना रहना चहिये। ऐसे कार्य कीजिये। ये विचार अखंड ज्ञान आश्रम भागवत धाम में भागवत कथा में स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा संसार छुटने के समय भजन नहीं बल्कि संसार में रहते हुए पल प्रतिपल भगवान का स्मरण करना चाहिए। भजन तो संसार को भूलकर करना चाहिए। अध्यक्षता स्वामी स्वरूपानन्द महाराज ने की। स्वामी पुरुषोत्तमनन्द मंचासीन रहे। आश्रम सहसंचालक स्वामी देवस्वरुपानन्द ने स्वागत और मुख्य यजमान सतीश अग्रवाल ने पोथी पूजन किया। कथा में विष्णु अग्रवाल, रमेश शर्मा, सतीश राठोड, अशोक तिवारी, संतोष जोशी, अशोक चौटाला, राजू हांकी, मधु शिरोडकर, आदित्य दीक्षित सहित कथा का हर दिन बड़ी संख्या में भक्तजन लाभ ले रहे है।

प्रेरणादायक भक्ति
भागवत कथा का लाभ लेने हर दिन सैकड़ो भक्त भागवत धाम पहुंच रहे है। इनमे एक नाम है दिव्यांग शकुन्तला उपाध्याय जो तपती दोपहर में अलकापुरी से अपनी ट्राईसायकल से अखंड ज्ञान आश्रम आ रही है। उन्हें कथा में लाने में 70 साल की उनकी बड़ी बहन कमला पुरोहित मदद करती है। दोनों बहने ट्राईसायकल पर बैठकर ही कथा का लाभ लेती है। 63 साल की शकुन्तला का कहना है महाराज की कथा में भक्ति रस की वर्षा होती है।

अब तो समझना होगा
जीवन में सकारात्मक पक्ष को महत्व दीजिये। भगवान का चित्र मन में बनाकर उसी का स्मरण करते रहो। इससे जीवन का हर क्षण मंगलमय होगा। नाम जप में भारी सामर्थ्य है। हमें इसी बात को भागवत कथा समझाती है। महाराजा परीक्षित को यही बात कथा सुनाते हुए गुरुदेव शुकदेव ने समझाई है। हमें भी समझना होगा कि कामना में मत उलझो क्योंकि कामनाएं ही मन को प्रभु में नही लगने देती है। इसलिए आंख से प्रभु दर्शन करें, कान से कथा सुने, सांस सांस में स्मरण हो तभी सार्थकता है।

संतोष की टेग लाईन
संतोष के नाम पर आलसी नहीं बनना चाहिए। वो लालच बेहतर है जो आलस्य को छोडकर पुरुषार्थी बना देता है। संतोष की टेग लाईन के भरोसे रहकर आलसी मत बनिये। संसार की तमाम सफलताओं के लिए उपासना की विधि भागवत जी में बताई गई है। इसलिए प्रयत्नशील होकर कथा सुनना चाहिए।

बच्चों को धर्म से जोड़ो
महाराज ने कहा कि अपने बच्चों में धर्म के संस्कार जरुर डाले। उनसे शिवजी का अभिषेक करवाइए। भगवान के प्रति यदि बच्चे की निष्ठा बन गई तो उसका सम्पूर्ण जीवन सवर जायेगा। धर्म और भक्ति के संस्कार जीवन के हर क्षेत्र में रक्षा करेंगे। जीवन की शोभा धर्म से है। धर्म से जुडिय़े आप अधर्म से स्वत बच जायेंगे।

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