रतलाम।परम पूज्य संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागरजी के परम शिष्य,शंका समाधान के निष्पाण विद्वान, मुनि श्री 108 प्रमाण सागरजी ने वर्षावास मंगल कलश स्थापना और ध्वाजारोहण के अवसर पर कहां है कि नकारात्मकता जीवन को नाकारा बना देती है। इसलिए हमेशा अपने आचार विचार को सकारात्मक रखो, व्यव्हार में नर्मी रखो और सहयोगी बनो। ये ही सफल जीवन की मूल पूंजी है।
दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना चातुर्मास समिति द्वारा लोकेन्द्र भवन में आयोजित चातुर्मास में रविवार को रतलामा सहित देश के कोने-कोने से आए मुनिभक्तों को आर्शीवचन देते हुए प्रमाणसागरजी ने कहां है कि बाजारी उपभोक्तावाद के दौरान में आयोजित चातुर्मास के दौरान धर्म, आध्यात्म और सत्संग के प्रति रुचि होना शुभ संकेत है।
उन्होने कहां कि धर्म की प्रभावना तभी सफल होती है जब जनभावना धर्म का सम्पर्ण हो। रतलाम का ये चातुमार्स जैन समाज के साथ ही यहां के प्रत्येक जनमानस की आस्था का केन्द्र बने हमारे ऐसे प्रयास होना चाहिए।
धर्म को हानि पहुचाने वाले अधर्मी-विराटसागरजी
मुनिश्री 108 विराट सागरजी ने संत और मुनिजनों की महिमा को अपरम्पार बताया है। उन्होने जिनवाणी के साधक संतों की छवि और धर्म की पताका लहराने वाले साधकों पर निशाना साधने वालों को धर्म विरोधी बताते हुए कहां है कि धर्म और संतों की छवि को हानि पहुचाने से बचे।
उत्सवी वातावरण में ध्वजारोहण और कलश स्थापना
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लोकेन्द्रभवन में आयोजित चातुर्मास में गुरु भगवंतों के सानिध्य में वर्षायोग ध्वजारोहण और मंगल कलश स्थापना के दौरान देशभर से आए धर्मानुरागी भाई-बहनों की मौजूदगी उत्सवी बन गया। जिनशासन के जयकारों के बीच समूचा पांडाल केसरिया रंगों से सजा धजा था तो मुनिश्री के ध्वजारोहण करते ढोल-नागड़ों और संगीत की मधुर ध्वनि से सराबोर हो गया। इसी अवसर पर मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन आदि क्रियाएं भी विधि विधान के साथ की गई। इस मौके पर मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से आगे धर्मानुरागियों मंगल कलश स्थापना की। कलश स्थापना व अन्य क्रियाओं में साधक बने धर्मालुओं का स्वागत सम्मान चातुर्मास समिति के अध्यक्ष ओम अग्रवाल व अन्य पदाधिकारियों ने किया। वर्षायोग कलश स्थापना के दौरान ही मुनिश्री के प्रवचनों पर आधारित पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस अवसर पर एक केलेण्डर का भी विमोचन हुआ।
