खबर पक्की, 26 अगस्त, रतलाम। फर्जी फर्म, कूटरचित दस्तावेज और नकली कोटेशन के माध्यम से बैंक से 17 लाख रुपए का ऋण प्राप्त करने के मामले में रतलाम न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव ने आरोपी जाकिर हुसैन को धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनका वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग करने सहित आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों में दोषी करार दिया है।
न्यायालय ने आरोपी को अलग-अलग धाराओं में 5 से 7 वर्ष तक के सश्रम कारावास और कुल 16 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। सभी कारावास की सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
दौना-पत्तल निर्माण इकाई के नाम पर लिया था 17 लाख का ऋण- अभियोजन के अनुसार जाकिर हुसैन ने अपनी पुत्री ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के तहत दौना-पत्तल निर्माण इकाई स्थापित करने के नाम पर बैंक से ऋण लेने की योजना बनाई थी। जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत किया गया।
मशीनरी खरीदने के लिए निक्की ट्रेडर्स, इंडस्ट्रियल एरिया, सांवेर रोड, इंदौर के नाम से कोटेशन लगाया गया। 25 लाख रुपए की मांग के विरुद्ध बैंक से 17 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत हुआ।
जांच में खुला फर्जी फर्म का राज- मामले की जांच के दौरान जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ और जांच अधिकारियों ने इंदौर के सांवेर रोड स्थित बताए गए पते का भौतिक सत्यापन कराया तो वहां निक्की ट्रेडर्स नाम की कोई फर्म अस्तित्व में नहीं मिली। संबंधित स्थान पर दूसरी कंपनी संचालित होना पाई गई और आसपास भी उक्त नाम की फर्म नहीं मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि ऋण की 17 लाख रुपए की राशि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की रेलवे कॉलोनी शाखा में निक्की ट्रेडर्स के नाम से खोले गए खाते में जमा कराई गई। अभियोजन के अनुसार यह खाता आरोपी जाकिर हुसैन ने स्वयं को फर्म का प्रोपराइटर दर्शाते हुए संचालित कराया था।
फर्जी कोटेशन, बैंक दस्तावेज और चेक बने अहम साक्ष्य- पुलिस जांच के दौरान निक्की ट्रेडर्स के नाम से तैयार कोटेशन, बैंक संबंधी दस्तावेज, चेक और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए गए। बैंक से फर्म के खाते से संबंधित पांच चेक और अन्य दस्तावेज भी प्राप्त हुए।
कोर्ट ने माना अभियोजन का मामला प्रमाणित- न्यायालय ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि आरोपी ने सह-आरोपी के साथ मिलकर बैंक से ऋण प्राप्त करने के लिए कूटरचित कोटेशन और दस्तावेजों का उपयोग किया तथा अस्तित्वहीन फर्म के नाम का सहारा लिया।
अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने मामले में प्रभावी पैरवी की। बैंक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य गवाहों के माध्यम से ऋण स्वीकृति, बैंक खाता, दस्तावेजों और मौके के सत्यापन से संबंधित साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
इन धाराओं में सुनाई सजा- न्यायालय ने आरोपी जाकिर हुसैन को धारा 420 में 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपए अर्थदंड,धारा 467 में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपए अर्थदंड,धारा 468 में 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपए अर्थदंड, धारा 471 में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपए अर्थदंड और धारा 120-बी में 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया है।सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और कुल 16 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
फर्जी फर्म और कूटरचित दस्तावेजों से लिया 17 लाख का बैंक ऋण, आरोपी को 7 साल का कठोर कारावास
