इस समय बॉलीवूड में स्टॉर कास्ट बड़ी और बड़े बजट की फिल्मों के रिलिज होने का सिलसिला चल पड़ा है। आने वाले समय में बड़े प्रोडक्शन हाऊसेस करोड़ों के प्रोजेक्ट लेकर फ्लोर पर आने वाले है। इन चुनौतियों के बावजूद छोटे प्रोडक्शन हाऊस भी रियल व सटीक स्टोरीज के साथ कम संसाधनों में सेल्युलाइट के पर्दे पर अपना लोहा मनवाने को बेताब है।
बीते शुक्रवार को यूं तो देश भर में बड़े बजट की कई फिल्में सिनेमा घरों में रिलीज हुई लेकिन प्रदेश के मालवा को केन्द्र में रखकर फिल्माई गई ‘‘मालवा-मराठा’’ भी फ्राईडे रिलीज की लिस्ट में नजर आई। इस फिल्म का निर्माण इशान फिल्म प्रोडक्शन द्वारा किया गया और निर्देशन हरिश दर्शन शर्मा का है। मूवी के गीत भूपेन्द्र तोमर, गुलशन इम्तयाज जावरा और उनकी टीम ने लिखे है। संगीत आदित्य गोड़ का है।
फिल्म की कहानी प्रभाकर राव मराठा नामक पात्र के इर्द गिर्द घुमती है। वक्त और हालात से परेशान यह पात्र निरूद्देश्य जीवन जीते-जीते तनहाईयों में खो जाता है इसी दौरान प्रभाकर के जीवन में संजना प्रेमिका बनकर आती है। इस युगल का प्रेम अभी परवान चढ़ा ही था कि समाज में व्याप्त गुंडागर्दी और संगठित अपराध को देख प्रभाकर विचलित हो जाता है वह समाज में फैली इन विषबैलों को जड़ से उखाड़ फेंकने का प्रण लेकर अपने लक्ष्य की ओर निकल पड़ता है। इस खतरों से भरे रास्तों पर उससे भारतीय पुलिस, न्याय पालिका या यूं कहे तो पूरे सिस्टम की खामियां और उसके काले पक्ष का चेहरा साफ-साफ नजर आता है। इसी तरह कहानी आगे बढ़ती है। मालवा-मराठा मूवी में लगभग 150 से अधिक कलाकारों ने अभिनय किया है। 8 महिनों तक फिल्म की शुटिंग चली। फिल्म निर्माण के दौरान निर्देशक हरिश दर्शन शर्मा को कई खट्टे-मिठे अनुभवों से गुजरना पड़ा। बकौल हरिश-‘‘ जब हम अर्थी वाले सीन को शूट कर रहे थे तो ग्रामीणों ने जीवित व्यक्ति की शवयात्रा में भाग लेने से इंकार कर दिया। बड़ी मुश्किल से शॉट ओके हुआ। इसी तरह फाईटिंग सीन में हमारे कई कलाकारों को चोंटे भी आई।‘‘
जहां तक मूवी के संवाद पक्ष की बात की जाये तो तुषार कोठारी ने डायलाग सरल तरीके से असर कारक लिखे है। मूवी में ‘‘पाटीदार हूँ पाटीदार मरने से नहीं डरना’’ दर्शकों को सीटी बजाने पर मजबूर कर देता है। संदीप जाट और उनके साथी मुकेश दोसीगांव व सुनील धोनी ने कैमरे में अच्छा वर्क किया है। मूवी के आयटम सांग ‘‘ मैं हूँ दिवानों का देशी बटर’’ और ‘‘साथिया’’ सांग के लिये गजब के एंगल निकाले है।
फिल्म के निर्देशक हरिश दर्शन शर्मा ने कहानी और उसके केन्द्रीय पात्र प्रभाकर राव मराठा की संवाद पात्र अदायगी को संतुलित करते हुए प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का बेहतर काम किया है। ‘‘मालवा मराठा’’ मूवी के सहायक पात्र रमजान अली और खलनायक मुसा खान ने भी आनस्प्रीन दर्शकों के मध्य खासा प्रभाव छोड़ा है। अधिकतर कलाकारों द्वारा फर्स्ट केमरा फेसिंग होने से कुछ दृश्यों में लुजिंग दिखती है लेकिन टाइमलाईन एडिटर ने बड़ी सफाई से इन कमियों को अपनी कटिंग से छुपा दिया है। मूवी के गाने भी कर्णप्रिय है। खासकर ओपनिंग थीम ‘‘वयम वीरा’’ प्रभावी है। सिनेमेटोग्राफी बड़िया स्तर की है लेकिन ज्यादातर शॉट 90 एंगल होने से थोड़ा कलरिंग कमजोर हो गया है। ओवरऑल पूरी मूवी अन्त तक दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब नजर आई। स्टॉर रेटिंग से रिव्यू किया जाये तो पहले हफ्ते ‘‘मालवा मराठा’’ फ़िल्म को तीन स्टॉर मिलने से शायद ही कोई रोक सके।
समीक्षक –
प्रदीप शर्मा
फिल्म मेकर व लेखक
मो.नं. 8982046047
जारीकर्ता
युवराजसिंह चौहान
मो.न. 9425105851
फिल्म समीक्षा, दर्शकों को आरंभ से अन्त तक बांधे रखती है ‘‘मालवा-मराठा’’ मालवा की पहली 3 स्टार रेटिंग फ़िल्म
