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जेल से जमानत पर रिहा हुए डी.पी. धाकड़, समर्थकों ने किया स्वागत

BySurendra Jain

Aug 31, 2017

 

रतलाम। जिला पंचायत के उपाध्यक्ष और कांग्रेस नेता डी.पी. धाकड़ को गुरूवार को जिला कोर्ट से जमानत पर रिहाई मिल गई है। शाम को जेल से रिहा होने के बाद समर्थकों ने डी.पी. का स्वागत किया। बगैर किसी रैली या हंगामे के वे परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर रवाना हो गए।

4 जून को किसान आंदोलन के दौरान डेलनपुर में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस दल पर पथराव कर तीन वाहनों में आग लगा दी थी। हिंसा में औद्योगिक थाने में पदस्थ एएसआई पवन यादव की आंख फूट गई थी और एसआई मोतीराम चौधरी सहित अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इस मामले में डी.पी. धाकड़ को पुलिस ने मुख्य आरोपी बनाया है। घटना के बाद से ही फरार चल रहे धाकड़ ने 28 जुलाई को एकाएक रतलाम जिला कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। हाइकोर्ट द्वारा गंभीर अपराध के एक मामले में 24 जुलाई को धाकड़ की जमानत स्वीकार ली थी लेकिन रतलाम जिला कोर्ट में प्रचलित दो अन्य मामलों में जमानत नहीं होने के कारण उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा सका था। बुधवार को न्यायिक दंडाधिकारी रतलाम द्वारा इन दो मामलों में भी जमानत स्वीकार किए जाने के बाद डी.पी. धाकड़ को रिहा करने के आदेश पारित किए गए। लेकिन पुलिस पुराने एक मामले का वारंट ले आई, गुरूवार को इस प्रकरण में भी जमानत कराई गई।

पुलिस ने न्यायालय में तर्क दिया है कि धाकड़ ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए भाषण दिया था, इसके बाद ही हिंसा हुई। इससे एक दिन पहले भी आईटीआई परिसर में धाकड़ ने वाहनों में आग लगाने की बात कहते हुए किसानों को संबोधित किया था। पुलिस ने दोनों भाषणों की सीडी भी सबूत के तौर पर तैयार की है। डेलनपुर हिंसा के मामले में अब तक 57 में 38 आरोपी गिरफ्तार व सरेंडर हो चुके हैं और अधिकांश की जमानत भी हो चुकी है।

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( प. दवे के साथ से आज तक डीपी धाकड़—— डी.पी. धाकड़ का किसानों के हित में संघर्ष नया नहीं है, इससे पहले भी वे किसानों के हित में 265 आंदोलन कर चुके है। छात्र जीवन से ही कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे प. मोतीलाल दवे के साथ जुड़कर डी.पी. धाकड़ वर्ष 2000 से किसान आंदोलनों में सहभागी रहे। डेरी त्रिवेणी बांध के आंदोलन ने डीपी धाकड़ को राजनैतिक पहचान दी, वे इस डेरी त्रिवेणी बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष थे। इस आंदोलन की सफलता पूरे मध्यप्रदेश में चर्चा का विषय रही। 2011 में डेरी त्रिवेणी बांध के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ डीपी धाकड़ ने आवाज उठाई। उनकी शिकायत की जांच के बाद जल संसाधन विभाग के ईई से लेकर टाइम कीपर तक कई लोग निलंबित हुए। 2012 में भाजपा के लिए ताकतवर माने जाने वाले वार्ड से मंडी प्रतिनिधि के रूप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसी तरह 2015 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा। यह चुनाव भी ऐसे वार्ड से लड़ा गया जहां भाजपा का वर्चस्व है और भाजपा के कई दिग्गज नेता यहां जुटे रहे, बावजूद इसके जिला पंचायत चुनाव में डीपी धाकड़ ने बाजी मारी। भाजपा में ही सेंध लगाकर वे जिला पंचायत उपाध्यक्ष पद पर भी काबिज हो गए। यहीं से शुरूआत हुई प्रदेशस्तरीय राजनीति की, यह डीपी धाकड़ की ही पहल थी कि प्रदेश के 51 जिलों में ही एक साथ पंचायत राज आंदोलन खड़ा हो सका। डीपी धाकड़ इसके संयोजक बने और पूरे प्रदेश में दौरा कर पंचायत राज प्रतिनिधियों को एक साथ एक मंच पर ले आए। पंचायत राज प्रतिनिधियों की आवाज की गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक गूंजी, खुद प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने भी डीपी धाकड़ पर आंदोलन वापस लेने के लिए दबाव बनाया।)

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