रतलाम। शहर में प्रभारी मंत्री दीपक जोशी का दौरा भाजपा से जुड़े ही कई समर्पित कार्यकर्ताओं को नाराज कर गया है। भाजपा कार्यालय पर संगठन की तरफ से कार्यकर्ताओं को इसलिए बुलाया गया था ताकि वे प्रभारी मंत्री के सामने अपनी शिकायतें और समस्याएं रख सके, हुआ इसके ठीक उलट। भाजपा के ही कार्यकर्ताओं की माने तो अधिकांश ने मौखिक रूप से प्रभारी मंत्री को कई तरह की समस्याएं बताई लेकिन एक भी कार्यकर्ता की समस्या को नोट नहीं किया गया। किसने क्या कहा, सब आया-गया हो गया। भाजपा के पूर्व शहर अध्यक्ष को तो बोलने का मौका तक नहीं दिया गया, इससे नाराज होकर वे बैठक से उठकर ही चले गए।
सुबह 10 बजे प्रभारी मंत्री दीपक जोशी पैलेस रोड़ स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे थे। प्रभारी मंत्री के सामने यहां 20 से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ताओं ने राजस्व विभाग, नगर निगम, लोनिवि और सामाजिक न्याय विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की शिकायत की। इस बैठक से बाहर निकले खुद पार्टी कार्यकर्ताओं ने ही मीडियाकर्मियों को बताया कि उनकी समस्याएं और शिकायतें सुनी जरूर गई लेकिन किसी ने नोट नहीं की।
30 पार्षद, बैठक में पहुंचे केवल 5
नगर निगम में भाजपा के 30 पार्षद है, इनमें से प्रभारी मंत्री की बैठक में केवल 5 ही पहुंचे थे। 8 एमआईसी सदस्यों में से केवल एक मंगल लोढ़ा ही यहां मौजूद थे। इनके अलावा ललिता पंवार, सोना शर्मा, अरूण राव और अनीता कटारा मौजूद थी। प्रत्यक्षदशियों के अनुसार जिस वक्त कार्यकर्ता प्रभारी मंत्री से नगर निगम से संबंधित समस्याएं बता रहे थे उस दौरान खुद महापौर डा. सुनीता यार्दे भी फोन पर व्यस्त थी।
मंत्री ने दिया पार्षदों की कमेटी बनाने का सुझाव
नगर निगम से संबंधित पार्टी कार्यकर्ताओं की ज्यादातर शिकायतों के बाद खुद प्रभारी मंत्री दीपक जोशी ने कहा- मैं महापौर जी से बात करने के बाद 4 पार्षदों की एक कमेटी बनवा रहा हूं। पार्टी कार्यकर्ता या आम लोग भी नगर निगम से संबंधित शिकायत या समस्या के लिए इस कमेटी के सदस्यों से बात कर सकेंगे। कमेटी के सदस्य ज्यादा से ज्यादा समय नगर निगम में उपलब्ध रहेंगे।
बैठक छोड़कर बाहर निकले पूर्व शहर अध्यक्ष
भाजपा के वरिष्ठ नेता, लोकतंत्र सैनानी और पूर्व शहर अध्यक्ष कन्हैयालाल चौधरी पार्टी कार्यालय में प्रभारी मंत्री के सामने अपनी बात रखना चाहते थे। वे जैसे ही खड़े हुए पार्टी के ही वर्तमान एक पदाधिकारी ने उन्हें बैठा दिया और चुप रहने को कहा। चौधरी इस रवैये से नाराज हो गए और बैठक कक्ष से बाहर चले गए।
