खबर पक्की : 27 सितंबर रतलाम। नगर में 14 वर्षीय बालिका के साथ हुए गैंगरेप के तीन आरोपियों का पुलिस रिमाण्ड न मांगते हुए ज्यूडिशियल रिमाण्ड मांगे जाने और न्यायालय व्दारा उसे स्वीकार किए जाने के बाद न्यायालय से चले जाने के विरोध में अधिवक्ताओं का कल से चल रहा धरना आज समाप्त हो गया। इस मामले के सम्पूर्ण घटनाक्रम पर मौके पर उपस्थित आमजनों, अधिवक्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार कल शाम करीब 05.30 बजे पुलिस थाना औद्योगिक क्षेत्र की उपनिरीक्षक पिंकी आकाश व्दारा गैंगरेप घटना से सम्बन्धित तीन आरोपियों का पुलिस रिमाण्ड आवेदन सम्बन्धित न्यायालय में प्रस्तुत न करते हुए उन्हे जेल भेजे जाने के सम्बन्ध में प्रस्तुत ज्यूडिशियल रिमाण्ड आवेदन प्रस्तुत किए जाने तथा उसे न्यायालय व्दारा स्वीकार किए जाने के बाद शुरु हुआ। जैसे ही अधिवक्ताओं को यह जानकारी मिली की आरोपियों को जेल भेज दिया गया है अधिवक्तागणों व्दारा सम्बन्धित न्यायाधीश साबिर अहमद खान के न्यायालय में पहुंचकर जानकारी ली गई। जिन्होंने बताया कि मामले की अनुसंधान अधिकारी व्दारा आरोपियों का जेल रिमाण्ड आवेदन पेश किया गया था इसलिए उन्हें जेल भेजे जाने के आदेश दिए गए हैं यदि वे पुलिस रिमाण्ड दिए जाने का आवेदन पेश करती तो उसे स्वीकार किया जाता। इसके पश्चात अधिवक्ताओं ने उपसंचालक अभियोजन सुशील कुमार जैन से सम्पर्क किया गया तो उनके व्दारा बताया गया कि अनुसंधान अधिकारी ने उन्हें बताए बगैर ही जेल रिमाण्ड आवेदन पेश कर दिया है इसलिए वे कुछ नहीं कर सकते हैं। इसी बीच सम्बन्धित न्यायालय के समक्ष उक्त घटनाक्रम के सम्बन्ध में आपत्ति किए जाने पर न्यायालय व्दारा कहा गया कि वे इस पर योग्य आदेश करेंगे इसलिए अधिवक्तागण इंतजार करें। इसके पश्चात अधिवक्तागण उनके न्यायालय में ही इंतजार करने लगे इसी बीच उन्हें ज्ञात हुआ कि न्यायाधीश साबिर अहमद खान वहां से अपने घर चले गए हैं, चूंकि उन्हें न्यायाधीश व्दारा कहा गया था कि वे आकर अपना योग्य आदेश देंगे इसलिए अधिवक्तागण उनके न्यायालय में बैठ कर उनका इंतजार करने लगे। 26 तारीख को शाम करीब 6 बजे शुरु हुआ इंतजार 27 तारीख की सुबह करीब 12 बजे उस समय खत्म हुआ जब न्यायाधीश साबिर अहमद खान दोबारा उनके न्यायालय में पहुंचे। 26 तारीख की शाम से शुरु हुए इस घटनाक्रम में अभिभाषक संघ अध्यक्ष, सचिव व्दारा अन्य अधिवक्ताओं को बताया गया कि वे साबिर अहमद खान के वापस आने तक उनके न्यायालय में ही रुकेंगे और घटना के सम्बन्ध में वे स्टेशन रोड़ स्थित आशीर्वाद होटल के संचालक, मालिक निमिष व्यास को भी आरोपी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं, एस पी गौरव तिवारी की इस घटना में संदिग्ध भूमिका वे मानते हैं और उनके खिलाफ भी कार्यवाही की मांग रख रहे हैं। इसी बीच रात करीब 12 बजे जिला न्यायालय के न्यायाधीश राकेश कुमार पाटीदार और डी.एस.कुमरे जिला न्यायालय पहुँचे और उनके व्दारा अभिभाषको की समस्या सुबह सुने जाने और उनका यथोचित हल किए जाने का आश्वसन दिया जाने लगा लेकिन अभिभाषक संघ अध्यक्ष, सचिव व अधिवक्ताओं व्दारा उन्हें कहा गया कि पहले साबिर अहमद खान को न्यायालय में बुलाया जावे क्योंकि वे उनका इंतजार कर रहे हैं। इस पर दोनों ही न्यायाधीश वहां से वापस आने का कहकर चले गए। अधिवक्ताओं के रात भर न्यायालय में ही रुकने की खबर नगर में फैलते ही विपक्षी दल के नेता न्यायालय में पहुंचना शुरु हो गए जिनमें सराफा बाजार और भाजपा के पदाधिकारी वकीलों के साथ ही न्यायालय में बैठने लगे जहां पर उनके व्दारा आपत्ति ली गई कि यह न्यायालय और वकीलों के बीच का मामला है इसलिए वे यहां राजनीति नहीं करें और अपनी राजनीति सड़क पर गौरव तिवारी के सामने करें, वकीलों की आपत्ति के बाद ये सभी न्यायालय से चले गए। इसके पश्चात मामले में समझौता प्रस्ताव लेकर एक अधिवक्ता व पत्रकार रात करीब 3 बजे पहुंचे और उनके व्दारा कहा गया कि एसपी गौरव तिवारी न्यायालय परिसर में नीचे आए हैं और उनके व्दारा आश्वासन दिया गया गया है कि वे मामले में एसआईटी गठित कर रहे हैं और अधिवक्ता अपने घर वापस चले जाएं। इस प्रस्ताव के समर्थन में बार अध्यक्ष व सचिव उनके साथ नीचे जाने लगे तभी पूर्व बार सचिव दीपक जोशी व अन्य अधिवक्ता आक्रोशित हो गए और उनके व्दारा अधिवक्ता व पत्रकार को कहा गया कि जब हमने अपनी मांग को लेकर उनके पास आए न्यायाधीशों को भी मना कर दिया तब हम एसपी के पास क्यूं जाए, उनको यहां बुलाया जावे। इस बीच विवाद हुआ और मामले की नजाकत देखकर बार अध्यक्ष व सचिव वापस अधिवक्ताओं के साथ न्यायालय में बैठ गए और अधिवक्ता व पत्रकार वापस लौट गए। 27 तारीख की सुबह तक बार अध्यक्ष व सचिव तथा सहयोगियों व्दारा अधिवक्ताओं को यह कहा गया कि वे एसपी गौरव तिवारी का ट्रांसफर- निलम्बन किए जाने, साबिर अहमद खान का ट्रांसफर और निलम्बन किए जाने, आशीर्वाद होटल के मालिक व संचालक निमिष व्यास को आरोपी बनाए जाने तक अपना धरना जारी रखेंगे इस सम्बन्ध में शिकायत जिला अभिभाषक संघ व्दारा डीजीपी, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय को ईमेल भेजकर अपने मांगो और की जाने वाली कार्यवाही से अवगत कराया गया है लेकिन जैसे ही सुबह अधिवक्ताओं के वाट्सअप ग्रुप पर होटल आशीर्वाद के संचालक प्रदीप अग्रवाल का फोटो शहर विधायक चैतन्य काश्यप के साथ वायरल हुआ वैसे ही बार अध्यक्ष, सचिव व्दारा मामले का पटाक्षेप किए जाने का मन बना लिया गया। इसके पश्चात बार अध्यक्ष व सचिव तथा अन्य पदाधिकारी जिला न्यायाधीश शोभा पोरवाल के बुलाने पर उनके कक्ष में करीब 1 घण्टा तक चर्चा करते रहे जबकि अन्य अधिवक्ता जो पूरी रात तक धरने पर बैठे उन्होंने साबिर अहमद खान के न्यायालय में मोर्चा सम्हाला और उन्हें आरोपियों का पुलिस रिमाण्ड देने का निवेदन किया गया इसी बीच थाना प्रभारी थाना स्टेशन रोड़ राजेन्द्र वर्मा, अनुसंधान अधिकारी पिंकी आकाश, सरकारी अधिवक्ता सुशील कुमार जैन, सीमा शर्मा, अनिल कुमार बादल व उनके सहयोगी साबिर अहमद खान के न्यायालय में पहुंचे और वहां आरोपियों का पुलिस रिमाण्ड दिए जाने का आवेदन पेश कर दिया इससे पश्चात न्यायालय व्दारा वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिेए आरोपियों का रिमाण्ड 28 तारीख की शाम 4 बजे तक स्वीकार किया गया। इसके पश्चात न्यायालय व्दारा अधिवक्ताओं से क्षमा मांग कर तथा इस प्रकरण में गम्भीरता से कार्यवाही किए जाने का आश्वसन दिया जाकर मामले का पटाक्षेप किए जाने का निवेदन किया जिसे अधिवक्ताओं ने स्वीकार कर लिया। वहीं दूसरी ओर बार अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों व्दारा एसपी गौरव तिवारी का ट्रांसफर, साबिर अहमद खान का ट्रांसफर और उनका निलम्बन, होटल आशीर्वाद के संचालक प्रदीप अग्रवाल की गिरफ्तारी आदि मांगों पर चुप्पी साध ली गई जिसका अधिवक्ताओं ने विरोध किया और अपने स्तर पर कार्यवाही किए जाने की बात कही गई। इस बीच बार पदाधिकारियों व्दारा आरोपियों के पुलिस रिमाण्ड को अपनी विजय बताकर मामले को खत्म किया गया जबकि अन्य अधिवक्ताओ ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यदि मामला केवल पुलिस रिमाण्ड तक ही सीमित था तो फिर उनकी रात क्यूं खराब की गई और एसपी गौरव तिवारी और न्यायाधीश के निलम्बन और उनके ट्रांसफर की मांगों को क्यूं छोड़ा गया। कुल मिलाकर अन्य अधिवक्ता अभी भी मैदान में डटे होकर पूरे मामले पर अपनी नजर रखे हुए हैं और समय आने पर वे अग्रिम कार्यवाही भी करेंगे।
