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प्रधानमंत्री आवास घोटाले की जांच एसआईटी या सीआईडी से कराने की मांग: सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बना घोटाला अमित पांचाल

BySurendra Jain

Apr 16, 2019

खबर पक्की: 16 अप्रैल रतलाम, प्रधानमंत्री आवास योजना में हुवे घोटाले के संबंध में आज घोटाले की शिकायतकर्ता ममता श्रीवास्तव के अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल ने प्रेस वार्ता आयोजित कर बताया कि ममता की ओर से पुलिस महानिदेशक भोपाल ईओडब्ल्यू भोपाल मुख्यमंत्री भोपाल को शिकायत कर बताया की आवास घोटाला पुलिस के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गया है। इसी कारण वास्तविक आरोपियों को बचाया जा रहा है अतः घोटाले की जांच सीआईडी या एस आईटी गठित कर करवाई जाने का निवेदन किया है शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया है कि नगर पालिक निगम रतलाम के कार्यपालन यंत्री सुरेश चंद्र व्यास ने खुद को बचाने के लिए एफ आई आर में से अपनी जिम्मेदारी छुपा ली गई जिस फर्जी सूची के आधार पर नगर पालिक निगम रतलाम से फर्जी हितग्राहियों को राशि का भुगतान हुआ उस पर सुभाष पंडित एमके जैन दीपक कुमावत राजकुमार सिंह और सुरेश चंद्र व्यास के भी हस्ताक्षर हैं इस सूची को सुरेश चंद्र व्यास ने एफ आई आर दर्ज करवाते समय छुपाया गया शिकायतकर्ता ने शिकायत में बताया है कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय को दिनांक 01.04.2019 को रजिस्टर्ड ए.डी. के माध्यम से की गई शिकायत पर आज दिनांक तक कोई ठोस कार्यवाही न होने पर तथा अपराध क्रमांक 0376-2018 ( पुलिस थाना स्टेशन रोड़ रतलाम) के अनुसंधान अधिकारी व्दारा सम्बन्धित न्यायालय में प्रस्तुत अन्तिम प्रतिवेदन दिनांक 30.03.2019 का अवलोकन किए जाने के पश्चात शिकायतकर्ता को ज्ञात हुआ है कि जिला कलेक्टर रतलाम व पुलिस अधीक्षक द्वारा व थाना प्रभारी थाना स्टेशन रोड़ रतलाम राजेन्द्र वर्मा व्दारा अपराध से सम्बन्धित आरोपियों से षडंयत्र कर उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। 

2. यह कि रतलाम जिले के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक द्वारा तथा थाना प्रभारी थाना स्टेशन रोड़ रतलाम राजेन्द्र वर्मा, अनुसंधान अधिकारी उपनिरीक्षक सुरेशचन्द्र गोयल  व्दारा प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए 13 लाख रुपये के घोटाले में आरोपियों को बचाने के लिए निम्नानुसार कृत्य किए गए और किए जा रहे हैं- 

1. यह कि दिनांक 11.06.2018 को पुलिस अधीक्षक रतलाम और कलेक्टर रतलाम को जाकिर हुसैन पिता घम्मन खान निवासी पी एन टी कालोनी रतलाम, पिन्टू उर्फ आकाश जॉन निवासी न्यू रेल्वे कालोनी, रोड़ नम्बर 5 रतलाम, जितेन्द्र उर्फ गोलू पिता राजेन्द्र सोलंकी, निवासी मकान नम्बर 1663 आई, गुजराती चाल, रेलवे कालोनी, रतलाम और नगर पालिक निगम रतलाम के अधिकारी व कर्मचारीगण के विरुध्द अपराध दर्ज किए जाने के सम्बन्ध में शिकायत दी गई।  शिकायत के साथ उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर नगर पालिक निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से शहर रतलाम में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर करीब 13 लाख रुपयों के घोटाले का खुलासा हुआ, जिसके अनुसार नगर पालिक निगम रतलाम के अधिकारियों व्दारा बगैर दस्तावेजों की जांच किए अन्य आरोपियों से मिलीभगत कर प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर पात्र व्यक्तियों को दी जाने वाली राशि षडयंत्र कर अपात्र व्यक्तियों के खातों में फर्जी दस्तावेज लगाकर ट्रांसफर कर दी गई और उनके व्दारा राशि का आहरण भी कर लिया गया। 

2. यह कि शिकायतकर्ता की शिकायत पर पूर्व पुलिस अधीक्षक रतलाम अमित सिंह और जिला कलेक्टर रतलाम श्रीमती रुचिका चौहान व्दारा कोई कार्यवाही नहीं की गई जबकि मेरी शिकायत पर एफआईआर होना थी। इसके विपरीत इस मामले के आरोपी सुरेशचन्द्र व्यास कार्यपालन यंत्री, नगर पालिक निगम रतलाम के आयुक्त एस.के.सिंह, लेखा अधिकारी, ऑडिट अधिकारी से षडयंत्र कर बगैर किसी आदेश या निर्देश पर सुरेशचन्द्र व्यास ने स्वयँ ही जांच शुरु की, जिसकी दो अलग-अलग रिपोर्ट दिनांक 14.06.2018 को तैयार की, जिसमें से एक जिला कलेक्टर रतलाम को भेजी और दूसरी पुलिस अधीक्षक रतलाम को भेजी गई। सुरेशचन्द्र व्यास ने पहली जांच रिपोर्ट में दीपक कुमावत और जाकिर हुसैन को दोषी बताया और दूसरी जांच रिपोर्ट में केवल दीपक कुमावत को दोषी बताया। 

3. यह कि सुरेशचन्द्र व्यास ने अपने जांच प्रतिवेदन में यह बताया  कि – सेडमेप कम्पनी व्दारा जिन हितग्राहियों के बैंक  खाता सम्बन्धी जानकारी पूर्ण होती है उन हितग्राहियों की सूची बनाई जाती है तथा इस सूची पर निगम के इंजीनियर, एजिस कम्पनी के असिस्टेंट रेजीडेन्ट इँजीनियर तथा सेडमेप कम्पनी के हस्ताक्षर होकर सूची भुगतान सम्बन्धी कार्यवाही हेतु नगर निगम के लेखा विभाग में प्रस्तुत की जाती है तथा इसी सूची पर सक्षम स्वीकृति उपरांत ऑडिट से भुगतान वाउचर पारित होने पर हितग्राहियों के खातों में किश्त की राशि अन्तरित की जाती है। 

4. यह कि इस प्रतिवेदन से सक्षम स्वीकृति देने वाले अधिकारी-कर्मचारी का नाम गायब कर दिया गया और  इस सूची पर हस्ताक्षर करने से पहले इन सक्षम स्वीकृति देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के कारनामों को जानबूझकर जांच प्रतिवेदन में छुपाया गया क्योंकि उक्त सक्षम स्वीकृति देने वाले अधिकारी नगर पालिक निगम और जिला प्रशासन से सम्बन्धित हैं, जिन्होंने निगम की सूची और स़़़ेडमेप व्दारा भेजी गई सूची का मिलान नहीं किया और जानबूझकर फर्जी सूची को स्वीकृत किया। 

5. यह कि नगर पालिक निगम रतलाम आयुक्त एस.के. सिंह, कार्यपालन यंत्री सुरेशचन्द्र व्यास, लेखा विभाग के सम्बन्धित लेखा अधिकारी, ऑडिट विभाग के अधिकारी व अन्य को बचाने का जिला प्रशासन व्दारा षडयंत्र किया और दिनांक 11.06.2018 को मेरे व्दारा की गई शिकायत पर बगैर किसी अधिकार से जांच की जाकर दिनांक 19.03.2019 को  आदेश पारित किया गया 

 अनुविभागीय अधिकारी रतलाम शहर के जांच प्रतिवेदन में जाकिर एवं दीपक की वित्तीय अनियमितता के प्रति संलिप्तता प्रदर्शित होती है। जिसमें से दीपक के विरुध्द एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। अत: जाकिर के विरुध्द भी एफआईआर दर्ज कराना वित्तीय अनियमितता के दृष्टिकोण से उचित है। आयुक्त नगर पालिक निगम रतलाम को निर्देशित किया जाता है कि वह जाकिर हुसैन के विरुध्द एफआईआर दर्ज करवाएँ तथा जिन अधिकारियों व कर्मचारियों के पत्रक भुगतान पर बिना पर्याप्त परीक्षण के हस्ताक्षर हैं उन पर गम्भीर लापरवाही की विभागीय जांच संस्थित करने हेतु सक्षम अधिकारी को भेजा जावे जबकि जिस दिनांक को यह आदेश दिया गया उस दिनांक को जाकिर हुसैन गिरफ्तार हो चुका था। 

6. यह कि जिला कलेक्टर व्दारा पारित आदेश के तत्काल पश्चात नगर पालिक निगम रतलाम के उपयंत्री सुहास पण्डित और एम.के.जैन को थाना स्टेशन रोड़ रतलाम व्दारा गिरफ्तार किया गया और न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक निरोध में भेज दिया गया। इन दोनों ही अधिकारियों व्दारा जिला कलेक्टर रतलाम व्दारा दिनांक 19.03.2019 को पारित आदेश की प्रति के साथ अपनी जमानत की अर्जी न्यायालय में पेश की गई और उसमें बताया गया कि जिला कलेक्टर रतलाम व्दारा उन्हें लापरवाही का दोषी बताया गया था और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने का आदेश दिया है। उक्त जमानत आवेदन दिनांक 15.04.2019 को न्यायालय व्दारा निरस्त कर दिए गए। 

7. यह कि कार्यपालन यंत्री जो कि स्वयं ही मामले का आरोपी है उसने बगैर किसी अधिकार के स्वयं ही मामले की जांच की और खुद को इस आधार पर बचाने का प्रयास किया गया कि जिन 13 अपात्र लोगों के खाते में रुपये ट्रांसफर किए गए थे उसकी फर्जी सूची सेडमेप कम्पनी के कर्मचारी दीपक कुमावत व्दारा तैयार की गई जिस पर उपयंत्री सुहास पण्डित और प्रभारी सहायक यंत्री एम.के.जैन व्दारा हस्ताक्षर किए गए जबकि इस अधूरी सूची के आधार पर कोई भुगतान नहीं हुआ बल्कि उस सूची के आधार पर अपात्र लोगों को राशि का भुगतान हुआ है जिस पर कार्यपालन यंत्री सुरेशचन्द्र व्यास, सेडमेप कर्मचारी दीपक कुमावत, प्रभारी सहायक यंत्री एम.के.जैन, उपयंत्री सुहास पण्डित और एजिस के राजकुमार सिंह के हस्ताक्षर हैं। इस तीसरी अनुमोदित सूची को चालान के साथ पेश किया गया है। इसी सूची के आधार पर घोटाले की राशि की भुगतान हुआ है। 

इस प्रकार सुरेशचन्द्र व्यास व्दारा यह जानकारी जांच प्रतिवेदन (जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई) में छुपाई गई कि उसके हस्ताक्षर भी उस फर्जी सूची पर हैं जिसके आधार पर घोटाले की राशि का भुगतान हुआ। यह सूची सुरेशचन्द्र व्यास और आयुक्त एस.के.सिंह ने  एफआईआर लिखाते समय पुलिस थाना स्टेशन रोड़ से छुपाई गई। । 

8. यह कि यह कि सुरेशचन्द्र व्यास कार्यपालन यंत्री व्दारा दिनांक 14.06.2018 को कलेक्टर रतलाम और पुलिस अधीक्षक रतलाम को दिए गए जांच प्रतिवेदन के चरण क्रमांक 10 में बताया गया है कि – सेडमेप कम्पनी व्दारा प्रस्तुत 320 हितग्राहियों की तृतीय सूची के अवलोकन के उपरांत पाया गया कि सूची के सरल क्रमांक 102 से 118 वाले पृष्ठ तथा सरल क्रमांक 119 से 135 वाले पृष्ठ पर मेरे हस्ताक्षर नहीं पाए गए जबकि मेरे व्दारा सेडमेप को उपलब्ध कराई गई मूल सूची के प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर किए हुए थे। जिन 13 अपात्र लोगों के नाम की फर्जी सूची पर सुरेशचन्द्र व्यास ने अपने हस्ताक्षर नहीं होना बताया है उनके नाम हैं- ममता पति राजेन्द्र, आकाश जॉन, जाकिर हुसैन पिता मोहम्मद हुसैन, रहीश खान पिता सलीम खान, एहतेशाम बानो पिता मोहम्मद साजिद, आशिक खान पिता बाबू, शकीला बानो पति जाकिर, अफरोज बी पति रहीश खान, दीपक सेवडिय़ा पति राजू, नासिर खान पिता रहीम, शहीना पति मोहसीन खान, नसीम पति मो. इब्राहिम, शहीना बी पति जावेद खान। 

जिस सूची पर अपने हस्ताक्षर होने से सुरेशचन्द्र व्यास ने इंकार किया है उस सूची से इन 13 लोगों को किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया गया है क्योंकि जब तक सुरेशचन्द्र व्यास, एजिस, सेडमेप, सुहास पण्डित, एम.के. जैन के हस्ताक्षर सूची पर नहीं होते हैं तब तक भुगतान की कोई प्रक्रिया शुरु ही नहीं होती है। जिस सूची के आधार पर इन 13 लोगों को भुगतान हुआ है उस सूची पर कार्यपालन यंत्री सुरेशचन्द्र व्यास, एजिस के राजकुमार सिंह, सेडमेप के दीपक कुमावत, उपयंत्री सुहास पण्डित, प्रभारी सहायक यंत्री एम.के. जैन के हस्ताक्षर हैं। 

9. यह कि यह फर्जी नामों वाली सूची अन्य सूचियों के साथ 25.05.2018 को सुरेशचन्द्र व्यास के हस्ताक्षर से भुगतान के लिए भेजी गई। नगर पालिक निगम व्दारा इस सूची के साथ भेजी गई अन्य सूचियों के आधार पर नोटशीट लिखी गई। इस नोटशीट क्रमांक 84 से 88 के अनुसार दिनांक 25.05.2018 को ही इसे लेखा विभाग भेजा गया, इसी दिन ऑडिट में भेजा गया, इसी दिन अन्य हितग्राहियों के साथ आयुक्त एस.के.सिंह ने हितग्राहियों को 1,47,0000 (एक करोड़ सैंतालीस लाख रुपये) के भुगतान की अनुशंसा की गई। एक ही दिन में इतनी बड़ी राशि के भुगतान की अनुशंसा बगैर किसी जांच-परीक्षण के किया जाना आयुक्त एस.के.सिंह और सुरेशचन्द्र व्यास, लेखा विभाग, ऑडिट विभाग के अधिकारियों को भी इस घोटाले में आरोपी बनाता है। 

10. यह कि इसी प्रकार 04.06.2018 को भी एक ही दिन में नगर पालिक निगम रतलाम व्दारा लिखी गई नोटशीट क्रमांक 90 से 94 पर दिनांक 04.06.18 को 2,63,50,000 का भुगतान 527 हितग्राहियों के बैंक खातों में किए जाने की अनुशंसा कर इसी दिनांक को की गई। जिस पर भी उपरोक्त अधिकारियों के ही हस्ताक्षर है। 

 11. यह कि दिनांक 10.09.2018 को (पृष्ठांकन क्रमांक 930/1/लोनिवि/2018 रतलाम दिनांक 15.09.2018) कार्यपालन यंत्री सुरेशचन्द्र व्यास व्दारा थाना प्रभारी स्टेशनरोड़ रतलाम को पत्र जारी कर बताया गया कि – 

हितग्राहियों के बैंक खाते का विवरण दर्शाने वाली सूची पर सेडमेप, एजिस व्दारा हस्ताक्षर किए जाने के पश्चात भुगतान की कार्यवाही के लिए सूची निगम के उपयंत्री को दी जाती है। उपयंत्री व्दारा उसका परीक्षण किया जाकर प्रभारी सहायक उपयंत्री व्दारा परीक्षण के बाद कार्यपालन यंत्री को दी जाती है, कार्यपालन यंत्री व्दारा आयुक्त को सूची भेजी जाती है, आयुक्त व्दारा लेखा विभाग को सूची भेजी जाती है, लेखा विभाग व्दारा आयुक्त को दोबारा सूची भेजी जाती है, आयुक्त व्दारा आडिट को सूची भेजी जाती है, इसके बाद लेखा विभाग व ऑडिट विभाग के अनुमोदन के बाद आयुक्त व्दारा ऑनलाइन अनुदान की राशि हितग्राही के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। इस प्रकार यह स्पष्ट था कि योजना के हितग्राहियों को राशि के भुगतान के लिए किन प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। 

12. यह कि दिनांक 01.11.2017 को कार्यपालन यंत्री सुरेशचन्द्र व्यास के हस्ताक्षर से प्रधानमंत्री आवास योजना के सम्बन्ध में कार्य आदेश क्रमांक 1248/2 जारी किया गया है जिसके अनुसार ईश्वर नगर के लिए अरविन्द दशोत्तर, विरियाखेड़ी के लिए सुहास पण्डित और बजरंग नगर के लिए राजेश पाटीदार उपंयत्री को नियुक्त किया गया था। इनके अतिरिक्त सेडमेप के विजय चौरे और एजिस के राजकुमार सिंह को नियुक्त किया गया था। इसमेें दीपक कुमावत का कोई नाम नहीं है और न ही सुहास पण्डित को बजरंग नगर क्षेत्र इस योजना के किसी भी कार्य के लिए आवंटित किया गया था। इसके बाद भी सुहास पण्डित व्दारा बजरंग नगर का कार्य किया जाना और दीपक कुमावत व्दारा फर्जी सूची पर हस्ताक्षर किया जाना बताया गया। इस आदेश में प्रभारी सहायक यंत्री एम.के.जैन का भी नाम नहीं है। 

13. यह कि दिनांक 28.08.17 को प्रधानमंत्री आवास योजना के टीम लीडर विजय चौरे (सेडमेप मध्यप्रदेश) व्दारा कार्यपालन यंत्री सुरेशचन्द्र व्यास को प्रधानमंत्री आवास योजना की टीम के सम्बन्ध में पत्र जारी किया गया, जिसके अनुसार टीम लीडर विजय चौरे, बैंकिंग प्रोफेशनल एस.सी. विभूते, मार्केङ्क्षटग प्रतीक कटारिया, सोशल डेवलपमेन्ट राजेश सोलंकी, आफिस असिस्टेंट दीपक कुमावत, आयुष त्रिवेदी टीम में शामिल हैं। इस टीम में शामिल अन्य व्यक्तियों का अनुसंधान में शामिल न कर पूरी जिम्मेदारी दीपक कुमावत की तय कर दी गई और उसे ही आरोपी बना दिया गया। इस दस्तावेज को चालान में  छुपाया गया है। 

14. यह कि दिनांक 30.03.2019 को थाना प्रभारी थाना स्टेशन रोड़ रतलाम और मामले के अनुसंधान अधिकारी सुरेश कुमार गोयल व्दारा जाकिर हुसैन के विरुध्द चालान सम्बन्धित न्यायालय में पेश किया गया, जिसमें आगे बताया गया कि दीपक कुमावत और शाहिद खान के विरुध्द अग्रिम अनुसंधान चल रहा है।  

इस प्रकार उपरोक्त सभी गैरकानूनी कार्य जिले के पुलिस व प्रशासनिक मुखिया के मार्गदर्शन में किए जा रहे हैं जिससे वास्तविक आरोपियों आयुक्त नगर पालिक निगम एस.के. सिंह, कार्यपालन यंत्री सुरेशचन्द्र व्यास, लेखा विभाग के अधिकारी, ऑडिट विभाग के अधिकारी को बचने का अवसर दिया जा रहा है जबकि ज्ञात आरोपियों को संरक्षण दिया जाना और उन्हेंं कानूनी सजा से बचाया जाना भी अपराध है। इसके अतिरिक्त भी समय-समय पर मुझे मिलने वाली दस्तावेजी जानकारी के अनुसार अन्य तथ्य व आरोपियों की जानकारी श्रीमान के समक्ष जांच के दौरान प्रस्तुत की जावेगी।  

सम्भवतया इन ज्ञात आरोपियों की आगामी कार्ययोजना यह हो सकती है कि पहले आरोपी एम.के.जैन,सुहास पण्डित की जमानत करवाई जावे और उसके बाद योजनाबध्द तरीके से न्यायालय में सरेण्डर कर समानता के आधार पर एक ही दिन में जमानत लेकर जेल जाने से बचा जावे। 

अत: श्रीमान से निवेदन है कि उक्त मामले का अग्रिम अनुसंधान निष्पक्षता से तत्काल CID अथवा SIT से करवाया जावे तथा उपरोक्त सभी अधिकारियों को प्रकरण में आरोपी बनाया जावे, जिससे कोई भी व्यक्ति स्वयं को कानून से ऊपर न समझ सके और आमजनों में न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास कायम रह सके।  

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