खबर पक्की: जीएसटी लागू होने के बाद से जहां एक नंबर में व्यापार करने वाले व्यापारी की फजीहत हो रही है और वह परेशान हो रहा है वहीं दो नंबर में व्यापार करने वालों की चांदी हो रही है। शुक्रवार की रात को इंदौर में 40 टन सरिए की गाड़ी सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी के अफसरों ने पकड़ी किंतु इस गाड़ी के पकड़ने से कुछ नहीं होने वाला है पूरे प्रदेश के अंदर खासकर मालवा अंचल में दो नंबर के अंदर सरिया, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, प्लाईवुड, प्लास्टिक के आइटम और अन्य अनेक आइटम धड़ल्ले से आ रहे हैं और दो नंबर के इन व्यापारियों ने एक नंबर में व्यापार करने वालों की नाक में दम कर रखा है और उनके व्यापार का भट्टा बिठा दिया है अगर सेंट्रल जीएसटी स्टेट जीएसटी ने जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया तो एक नंबर में व्यापार करने वाली दुकानों में ताला लगना निश्चित है सरिया का ज्यादातर काम महाराष्ट्र के जालना से होता है और वहां से प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में गाड़ियां निकलती है और इसमें से 70 फीसदी गाड़िया दो नंबर में निकलती है बॉर्डर की चेक पोस्ट खत्म होने से और रास्ते में चेकिंग की कोई व्यवस्था ना होने से सप्लाय प्वाइंट और डिलेवरी प्वाइंट के स्थानीय अफसरों की मिली भगत से धड़ल्ले से दो नंबर का काम जारी है जिससे सरकार को हर महीने करोड़ों रुपए का राजस्व का नुकसान हो रहा है एक अनुमान के अनुसार रतलाम मंदसौर नीमच और आसपास के जिलों में ही हर महीने 100 से ज्यादा ट्रक सरिया 2 नंबर में आ रहा है केंद्र और राज्य सरकार को तुरंत इस बारे में कदम उठाना चाहिए बाहर से आने वाला सरिया जहां दो नंबर में आता है वही स्थानीय व्यापारी सरिया की लोकल मध्य प्रदेश की बिलिंग करवा कर अफसरों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं क्योंकि ज्यादातर सरिया खरीदने वाले बिल नहीं लेते हैं लोकल में बिल के लेन-देन में उनको कम खर्च में काम हो जाता है। यही नहीं सूत्रों ने बताया कि 2 नंबर में आने वाले सरिए का भुगतान लेने के लिए एंबुलेंस में लोग आते हैं और पेमेंट कलेक्ट कर एंबुलेंस से ही निकल जाते हैं। अतः सरकार को इस 2 नंबर के पूरे खेल को रोकने के लिए बड़े कदम उठाने होंगे।
