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रतलाम में अपने 4 माह के जुड़वां बच्चों की हत्या करने वाली कलयुगी मां को दोहरा आजीवन कारावास, पिता को साक्ष्य छिपाने पर 3 साल की सजा

BySurendra Jain

Jul 31, 2026

खबर पक्की, 31 जुलाई, रतलाम। रतलाम के बहुचर्चित चार माह के जुड़वा बच्चों की पानी की सिंटेक्स टंकी में डुबोकर हत्या करने के मामले में अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी मां पम्मी उर्फ मुस्कान को दोहरे आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं बच्चों के पिता आमिर कुरैशी को साक्ष्य छिपाने का दोषी मानते हुए 3-3 वर्ष के कारावास एवं 2 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने बताया कि मामला 20 नवंबर 2024 का है। वेदव्यास कॉलोनी निवासी इरशाद कुरैशी ने माणकचौक थाने पर सूचना दी थी कि उसके मकान की ऊपरी मंजिल पर किराए से रहने वाले आमिर कुरैशी और उसकी पत्नी पम्मी उर्फ मुस्कान के चार माह के जुड़वा बच्चे हसन और फातिमा पानी की टंकी में मृत मिले हैं। घटना के बाद दोनों बच्चों के शव बिना पुलिस को सूचना दिए शैरानीपुरा कब्रिस्तान में दफना दिए गए थे।
प्रकरण की जांच के दौरान तहसीलदार की मौजूदगी में दोनों बच्चों के शव कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें दोनों की मौत डूबने से होना प्रमाणित हुआ। पुलिस जांच और साक्ष्यों से सामने आया कि घटना वाले दिन आमिर अपने रिश्तेदारी में शोक कार्यक्रम में जा रहा था। मुस्कान ने उससे घर पर रुकने की बात कही थी, क्योंकि वह अकेले दोनों जुड़वा बच्चों को संभाल नहीं पाएगी। आमिर और उसकी मां के नहीं रुकने से नाराज मुस्कान ने दोनों बच्चों को खत्म करने का फैसला कर लिया।
जांच में सामने आया कि मुस्कान ने पहले एक और फिर दूसरे चार माह के मासूम को घर में रखी सिंटेक्स की पानी की टंकी में डुबोकर मार दिया। इसके बाद उसने पति को फोन कर बच्चों के लापता होने की झूठी सूचना दी। आमिर और उसका दोस्त बिलाल घर पहुंचे और बच्चों को टंकी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस को सूचना देने के बजाय शवों को कब्रिस्तान में दफना दिया गया।
पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मुस्कान के खिलाफ हत्या तथा आमिर के खिलाफ साक्ष्य छिपाने का प्रकरण दर्ज किया। मामले के विचारण के दौरान अभियोजन ने 24 साक्षियों को पेश किया, जिनमें से 16 साक्षी पक्षद्रोही (होस्टाइल) हो गए। इसके बावजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों के आधार पर न्यायालय ने मुस्कान को दोनों बच्चों की हत्या तथा आमिर को साक्ष्य छिपाने का दोषी ठहराया।प्रकरण में शासन की ओर से प्रभावी पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने की।

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