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खेत के सेड़े के विवाद में किसान की हत्या, तीन आरोपियों को आजीवन कारावास- वैज्ञानिक, फोरेंसिक और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत का बड़ा फैसला

BySurendra Jain

Jul 31, 2026

खबर पक्की, 31 जुलाई, रतलाम। रतलाम जिले के सैलाना क्षेत्र में खेत के सेड़े (मेड़) की रंजिश को लेकर हुई चर्चित हत्या के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने वैज्ञानिक, फोरेंसिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को निर्णायक मानते हुए आरोपी विजयसिंह देवड़ा (36) निवासी ग्राम दिवेल, दीपक उर्फ दीपु सोनेर (38) निवासी रेल नगर, रतलाम तथा जस्सु उर्फ जसवंत सोलंकी (40) निवासी रतलाम को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया।
अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि 9 नवंबर 2024 को थाना सैलाना की धामनोद चौकी अंतर्गत ग्राम दिवेल में खेत पर सो रहे हिम्मतसिंह (48) निवासी ग्राम खेड़ी का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था। मृतक के भाई चंद्रसिंह द्वारा सूचना दिए जाने पर चौकी प्रभारी आनंद बागवान मौके पर पहुंचे। जांच में मृतक के दोनों हाथ और बायां पैर टूटा हुआ मिला तथा शरीर और कपड़ों पर खून के निशान थे। इसके बाद मृतक के भाई कमलसिंह की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया।
घटनास्थल से पुलिस ने खून से सना पत्थर, खून लगी गोदड़ी, आम के पेड़ के नीचे पड़ी अधजली बीड़ी तथा हरे रंग की बीयर की बोतल के टूटे हुए कांच के टुकड़े जब्त किए। जांच में सामने आया कि मृतक अपने खेत की रखवाली करता था और रात में वहीं सोता था। अगले दिन सुबह उसका बड़ा भाई खेत पहुंचा तो हिम्मतसिंह मृत अवस्था में मिला।
मोबाइल रिकॉर्डिंग से खुला हत्या का राज
जांच के दौरान चौकी प्रभारी आनंद बागवान को मृतक के चचेरे भाई विजयसिंह के मोबाइल फोन में घटना से जुड़ी कॉल रिकॉर्डिंग मिली। संदेह के आधार पर पूछताछ में विजयसिंह ने खेत के सेड़े के विवाद को लेकर अपने साथी दीपक और जसवंत के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से हत्या करना स्वीकार किया।
पुलिस ने उसका मोबाइल जब्त कर कॉल रिकॉर्डिंग सुरक्षित की। बाद में दीपक ने सैलाना न्यायालय में आत्मसमर्पण किया, जबकि जसवंत को गिरफ्तार कर दोनों से पूछताछ के बाद हत्या में प्रयुक्त लकड़ी और मोटरसाइकिल भी बरामद की गई।
डीएनए, फोरेंसिक और वॉयस मैचिंग बने मजबूत साक्ष्य
अभियोजन के अनुसार इस मामले में डीएनए रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (ष्टष्ठक्र), मोबाइल डेटा विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक एवं चिकित्सकीय साक्ष्यों ने हत्या की पूरी कड़ी को प्रमाणित किया। आरोपी विजयसिंह और दीपक के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्ट तथा वॉयस सैंपल का भोपाल स्थित वॉयस लैब में मिलान कराया गया, जिसमें दोनों की आवाज समान पाई गई।
मोबाइल कंपनियों से प्राप्त कॉल डिटेल और लोकेशन विश्लेषण से यह भी सिद्ध हुआ कि घटना से पहले और बाद तक तीनों आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। वहीं घटनास्थल से बरामद गोदड़ी और दीपक से जब्त लकड़ी पर मृतक हिम्मतसिंह का रक्त पाया गया। बीयर की बोतल के कांच और अधजली बीड़ी पर मिली लार का डीएनए आरोपी जसवंत से मेल खाया।
सनसनीखेज प्रकरण में आया फैसला
पुलिस ने इस हत्या को चिन्हित एवं सनसनीखेज प्रकरण घोषित किया था। तीनों आरोपी गिरफ्तारी के बाद से लगातार जेल में बंद हैं। अदालत ने वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए तीनों को हत्या का दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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