खबर पक्की : राजनेतिक पार्टिया एक तरफ जाति व्यवस्था का विरोध जताती है दूसरी और जातियों के आधार पर सुविधाए एवं चुनावो मे टिकट देती है। दोहरा मापदंड देश के लिए घातक है। जातियों की व्यवस्था कार्य के आधार पर स्वतः बनी है जन्म के आधार पर नहीं बनी है। लेकिन एक एक ऋषि ने मनुष्य जीवन को सुगम बनाने के लिए एक एक कार्य की जिम्मेदारी ली और पिड़ी दर पिड़ी उसी कार्य पर अनुसंधान करते हुए विश्व को सर्वश्रेष्ठ परिणाम दिए। श्रेष्ठ जाती व्यवस्था के कारण समाज के हर व्यक्ति के पास रोजगार का अपना साधन होता था इसकारण समाज मे बेरोजगारी नहीं थी। उक्त विचार सर्वब्राह्मण समाज रतलाम द्वारा आचार्य चाणक्य स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित “श्रेष्ठ जाति व्यवस्था बनाम जातिवाद” विषय पर व्याख्यान में प.पु.जगद्गुरु शंकराचार्य भानपुरापीठाधीश्वर स्वामी श्री दिव्यानन्दजी तीर्थ ने व्यक्त किये।
कार्यक्रम संयोजक पुष्पेन्द्र जोशी ने विषय की अवधारणा रखते हुए कहा की जाति व्यवस्था ने विश्व को सर्वश्रेष्ठ देने की व्यवस्था दी, लेकिन जातिवाद से चंद लोगो ने फायदा उठाकर अपनी ही जाती को पीड़ियो तक दुष्परिणाम भुगतने के लिए छोड़ दिया है।
कार्यक्रम के प्रारंभ मे दीप प्रज्वलन विशेष अतिथि सनातन धर्मसभा के अध्यक्ष कोमल सिंह जी राठोर एवं रमेश व्यास द्वारा किया गया। सभी जाति समाज के प्रतिनिधियो ने जगद्गुरु का स्वागत किया।
पंडित रामचंद्र शर्मा, राजेश दवे, सुधीर सराफ,मिलिंद करंदीकर ,बंसीलाल शर्मा ,बद्रीलाल शर्मा, नरेन्द्र जोशी गुल्लु, नवनीत मेहता,वीरेन्द्र कुलकर्णी, भवानी शंकर मोड़, सुनील शर्मा, सतीश तिवारी, शरद शुक्ला, सूरजमल टांक , नवनीत सोनी, धन्नालाल पाटीदार, गोविन्द राठी, अशोक शर्मा, सत्यनारायण पालीवाल, कैलाश जोशी, दुर्गाशंकर ओझा, विजय जैन, कन्हैयालाल मौर्य, गोपाल झवेरी, जगदीश माली, गोपाल भूतिया, रामचंद्र मटोरिया, लालचंद टांक, एम.एम. बटवाल, ताराबेन सोनी, उर्मिला जोशी, राखी व्यास, भावना जोशी, सीमा चावड़ा, मोक्षिका जोशी, योगिता मेहता सहित बड़ी संख्या मे सभी समाजजन उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन ब्रजेन्द्र मेहता ने किया और आभार मनकामनेश्वर जोशी ने माना।
प्रदूषित राजनीती ही जातिवाद को फ़ैलाने की जिम्मेदार है।
