खबर पक्की : रतलाम। विगत दिनों बाजना तहसील के ग्राम पोनबट्टा निवासी 11 वर्षीय बालक व्दारा भूख की वजह से जहरीली दवाई पीने और इसके बाद प्रशासन व्दारा की गई कारगुजारियों की पोल स्वयँ बालक, उसके माता-पिता, दादा, बहनों आदि रिश्तेदारों ने खोल दी।
उल्लेखनीय है कि 29 दिसम्बर को बाजना तहसील के ग्राम पोनबट्टा निवासी एक बालक सुनील जिसके माता-पिता मजदूरी के लिए कोटा राजस्थान गए हुए थे पंचायत की राशन की दुकान पर घर में गेहूं आदि नहीं होने पर अपनी दो बहनों के साथ राशन लेने गया था, राशन की दुकान वाले ने कई दिनों तक उसे राशन नहीं दिया और टालमटूल की। भूख से परेशान बालक ने कपास में डालने वाली जहरीली दवाई का सेवन कर लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे बाजना के सरकारी अस्पताल और उसके बाद रतलाम बाल चिकित्सालय में उपचार के लिए लाया गया। वहीं दूसरी ओर भूख की वजह से बालक व्दारा जहरीली दवाई का सेवन करने की खबर अखबारों में छपते ही सैलाना एसडीएम लक्ष्मी गामड़, तहसीलदार बाजना, तहसीलदार सैलाना, थाना सैलाना का पुलिस बल और प्रशासनिक अमला गांव में ही रहने वाले बालक के दादा ज्योति के घर पहुंचा और अगले दिन यह सफाई देकर मामले को दबाने का प्रयास किया गया कि बालक और उसका परिवार उसके दादा के यहाँ ही रहता था और उनके घऱ में मक्का, चावल आदि अनाज मौजूद था, बालक ने किसी और वजह से जहरीली दवाई का सेवन किया था, यही बात अधिकारियो अर्थात sdm लष्मी गामड़ द्वारा कलेक्टर को भी बताई गई और उन्हें गुमराह किया गया यही कारण है की कलेक्टर तक वास्तविक जानकारी नही पहुंची जबकि वास्तविकता अनुसार बालक का दादा अलग रहता है और बालक और उसका परिवार अलग रहता है, दोनों के राशन कार्ड भी अलग-अलग हैं और बालक के पिता ने अपने हिस्से की 2 बीघा पैतृक जमीन इलाज हेतु पैसे की जरूरत होने से पच्चीस हजार में गिरवी रखी हुई है। बालक और उसका परिवार अत्यंत गरीब है और उसका मकान भी टुटा हुवा है। माह दिसम्बर 2018 का राशन नहीं दिए जाने का उल्लेख उसके राशन कार्ड पर है। आश्चर्यजनक रुप से 30 दिसम्बर रात को कलेक्टर द्वारा मिलने के पश्चात से 02 जनवरी तक बाल चिकित्सालय में उपचार रत इस बालक की देखरेख या अन्य किसी भी प्रकार की सरकारी मदद के लिए उसके पास न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी गया और न ही कोई पुलिसकर्मी। दूसरी ओर मामले को दबाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा प्रशासनिक अमला सहित सैलाना एसडीएम लक्ष्मी गामड़, तहसीलदार, पटवारी, गिरदावर, बाजना थाना के कई पुलिसकर्मियों ने 02 जनवरी की शाम बालक के दादा और उसके अन्य परिजनों के घर पर धावा बोल दिया, उसके घर की वीडियो बनाई, फोटो खींचे, कोरे कागजों पर उनके हस्ताक्षर करवाए गए और उन्हें धमकाया गया कि बालक व्दारा भूख लगने की वजह से जहरीली दवाई पीने वाली बात किसी को बताई तो ठीक नहीं होगा। इनसे घबराकर बालक के दादा सहित अन्य परिजन 03 जनवरी को रतलाम आए और एसपी कार्यालय में शिकायत दी लेकिन उस दिन SP से मुलाकात न होने पर 04 जनवरी को फिर ऑफिस पहुंचे वहा एडिशनल SP प्रदीप शर्मा से मिले और उन्हें पूरा वाकया बताया, साथ ही यह भी बताया गया कि बाल चिकित्सालय में भर्ती रहने के दौरान बालक के बयान पुलिस व्दारा नहीं लिए गए, बालक को जल्दबाजी में बाल चिकित्सालय से छुट्टी दिलाई गई। बालक और उसके परिजनों व्दारा एडिशनल एसपी से कहा गया कि सभी दोषियों के खिलाफ कार्यवाही आज ही नहीं होने पर वे एसपी आफिस के बाहर ही बैठेंगे, मामले की गम्भीरता को समझते हुए एडिशनल एसपी ने SDOP सैलाना को फोन किया और सम्बन्धित पुलिसकर्मी को इनके बयान लेने के लिए रतलाम बुलाया, जिस पर एक एएसआई जो रतलाम में आया हुआ था उसके व्दारा बालक, उसकी दोनों बहनों, दादा और पिता के कथन लिए। बालक व्दारा अपने कथनों में बताया गया कि उसके माता-पिता मजदूरी करने के लिए कोटा राजस्थान गए हुए थे वह घऱ में आटा खत्म हो जाने से राशन की दुकान पर गेहूं आदि सामान लेने के लिए अपनी छोटी बहनों के साथ गई बार गया लेकिन उसे राशन नहीं दिया गया जिस पर भूख से बेहाल होने के बाद उसने कपास में डालने वाली जहरीली दवाई पी ली। कथन लिए जाने के बाद बालक के परिजनों ने एक बार फिर बताया कि अगर उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई तो वे दोबारा एसपी आफिस आकर वहीं धरना दे देंगे और पूरे घटनाक्रम से मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे। इधर इस मामले में SDM सैलाना द्वारा कलेक्टर को सही जानकारी नही देने और साथ ही लष्मी गामड़ के रीडर द्वारा राजस्व विभाग के चैन मेंन से बोरिंग की परमिशन के लिये 3000 रु रिश्वत लेते लोकायुक्त द्वारा रंगे हाथों पकड़े जाने पर उनके व्दारा एसडीएम लक्ष्मी गामड़ का तबादला सैलाना से रतलाम कर दिया गया और वहां रणजीत कुमार को एसडीएम नियुक्त कर दिया गया। लेकिन बालक और उसके परिजनों के साथ लष्मी गामड़ व अन्य अधिकारियों व्दारा की गई कारगुजारियों का विरोध करने वाले बालक के परिजनों व्दारा उक्त लड़ाई आगे तक लड़े जाने के संकेत दिए गए हैं।
राशन नहीं मिलने के कारण जहर खाने वाले सुनील के परिजन और सुनील ने की एसपी को शिकायत
