खबर पक्की: लगता है निगमायुक्त सिंह ने भाजपा की सुपारी ले रखी है। पहले ड्रेनेज लाइन के नाम पर पूरे शहर को खुद वा दिया। फिर ड्रेनेज लाइन पूरी होने तक पूरे शहर की सड़कों का काम रुकवा दिया। छतरी पुल गिरने के उपरांत भी बायपास बनवाने के लिए पहल नहीं करना और कलेक्टर को खड़े रहकर बायपास बनवाना पड़ा। फिर अधूरे छतरी पुल का उद्घाटन मुख्यमंत्री से करवा लिया लेकिन अप्रोच रोड नहीं बना कर एक महिला की जान ले ली। 6 महीने पूर्व से टेंडर होने के बाद भी पेचवर्क चालू नहीं करना और अभी कलेक्टर द्वारा पत्र दिए जाने के बाद पेचवर्क चालू किया गया। निगमायुक्त का पूरा क्रियाकलाप देखने के बाद ऐसा लगता है जैसे भाजपा परिषद को फेल करने के लिए जी जान से लगे हुए हैं यही कारण है कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए क्रेन वाले को 4:30 लाख रुपए का भुगतान पेंडिंग होने के बाद भी नहीं किया जा रहा है इस वजह से 1 महीने से शहर में घूमने वाली क्रेन बंद हो गई है। जबकि उक्त यातायात क्रेन से नगर निगम को 75000 से ₹100000 महीना प्राप्त होता है। उसके बावजूद ₹45000 महीने का भुगतान क्रेन वाले को नहीं करना बताता है कि किस तरह शहर की यातायात व्यवस्था को फेल किया जाए और जनता के क्रोध को बढ़ाया जाए। रतलाम जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को निगमायुक्त की कार्यशैली को गंभीरता से लेना होगा जो की जनता के लिए काफी दुखदाई साबित हो रही है यह चाहे जिस पार्टी से संबंधित हो लेकिन जनता के दुख दर्द को इन को सुनना ही होगा नहीं तो शहर में किसी भी दिन कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो सकती है।
