खबर पक्की: यूं तो नगर निगम के अंदर सबसे ताकतवर प्रशासनिक पद निगम आयुक्त का होता है अगर कोई भी निगमायुक्त अच्छा काम करता है तो सफलता का सेहरा महापौर के सर बंधता है और खराब काम करता है तो ठीकरा महापौर के सर ही फूटता है। यही कारण है कि शहर की बदतर और बदहाल सड़कों के लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए कराए गए खबर पक्की के सर्वे में 72 परसेंट लोगों ने महापौर को जिम्मेदार माना है और 28 परसेंट लोगों का मानना है कि इसके लिए निगम आयुक्त जिम्मेदार है। यह सही है कि इसके लिए ज्यादा जिम्मेदार निगमायुक्त है लेकिन फिर भी जनता ने महापौर को जिम्मेदार इसलिए माना है क्योंकि जनता ने अपनी ताकत महापौर को दी है और जनता की आशाओं और अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी उनकी है वह यह बहाना लेकर नहीं बच सकती कि मैं क्या करूं निगमायुक्त मेरी सुनते नहीं है। क्योंकि जनता ने ताकत आपको दी है तो जनता की आशा और अपेक्षाओं पर खरा उतर के उनकी लड़ाई आपको ही लड़ना है। लेकिन पूरे कार्यकाल के दौरान जनता को एक बार भी ऐसा नहीं लगा कि महापौर उनकी लड़ाई लड़ रही है। यही कारण है कि सर्वे में जो रिपोर्ट निगमायुक्त की आना थी और उनको दोषी ठहराया जाना था लेकिन चूँकि किसी भी मोर्चे पर जनता की लड़ाई लड़ते हुए महापौर नजर नहीं आई इसलिए जनता ने उनको ही जिम्मेदार माना है।
