खबर पक्की: जिले का एकमात्र कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा स्वर्गीय महेंद्र सिंह जी की मृत्यु के पश्चात ही अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपने को दे का अखाड़ा बना हुआ है। देश के करदाताओं द्वारा चुकाये गये पैसे से केंद्र सरकार से प्रदत्त अनुदान से चलने वाला यह केंद्र यूँ तो किसानों की उन्नति के लिये बनाया गया है। ताकि किसान यहाँ किये अनुसंधान का फायदा उठा कर वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर अपने जीवन स्तर को उठा सके। किन्तु जब से एस केंद्र के संस्थापक महेंद्र सिंह जी का देहांत हुआ है तब से ही यह केंद्र अनियमितताओं और निजी लाभ का अखाड़ा बन चुका है। सरकार से मिली सौ बीघा जमीन अनुसंधान के उपयोग में न लेते हुए नीलाम कर दी जाती है मनमर्जी से इस केंद्र का चार्ज प्रशिक्षु कर्मचारी को दे दिया जाता है साक्षात्कार 9 और 10 अगस्त को लिए जाते हैं लेकिन उनका परिणाम घोषित नहीं किया जाता है और जब इन अनियमितताओं की खबरें लगती है तो आनन-फानन में बगैर अपॉइंटमेंट लेटर के लोगों को भर्ती कर ज्वाइनिंग करा दी जाती है यह खबर पक्की का ही असर है कि साक्षात्कार लिए लोगों को आज जॉइनिंग करा दी गई एक वैज्ञानिक चतरा मल और दूसरे वैज्ञानिक रामधन को आज आनन-फानन में जॉइनिंग कराई गई और इसकी सूचना केंद्र के लोगों को भी नहीं थी इसके अलावा होम साइंस में सहायक के पद पर कार्यरत बरखा शर्मा को बगैर नए पद का सृजन किए वैज्ञानिक के पद पर नियुक्ति दे दी गई जबकि भारतीय कृषि विज्ञान अनुसंधान परिषद से इसके लिए अनुमति भी नहीं ली गई यह आश्चर्य का विषय है कि 9 व् 10 अगस्त को हुए साक्षात्कार का परिणाम अभी तक घोषित नहीं किया गया था लेकिन जैसे ही अनियमितताओं की खबरें प्रकाशित होना शुरू हुई आनन-फानन में नियुक्ति दी गई। गौर करने वाली बात यह है कि होम साइंस के जिस पद को भरा गया है उस पद के लिए 1 दर्जन से भी ज्यादा योग्य कैंडिडेट थे लेकिन जिस उम्मीदवार को वरीयता दी गई वो अन्य से योग्यता में काफी नीचे है और पूर्व से ही केंद्र में सहायक के पद पर कार्यरत थी और उसको फायदा देने के लिए भर्ती और साक्षात्कार की नोटंकी की गई ।इसी प्रकार अन्य भर्ती में भी केंद्र के हितों की जगह निजी हितो को तरजीह दी गई।इससे केंद्र का पूरा प्रबंधन सन्देह के घेरे में आ गया है।
