ख़बरपक्की:भोपाल, मध्यप्रदेश प्रदेश सरकार ने एक बड़ा खेल करते हुवे 12सितम्बर 2017 को परिवहन मंत्रालय से एक आदेश निकाला की 21 कम्प्यूटराइज्ड परिवहन चौकियों पर परिवहन विभाग का कोई कर्मचारी नियुक्त नही किया जायेगा इस आदेश को परिवहन आयुक्त ग्वालियर ने 13 सितम्बर को एक पत्र के द्वारा अमलीजामा पहनाया ।इस निर्णय को ऐसे प्रचारित किया गया था जैसे ट्रांसपोर्टर को बड़ा भारी फायदा कर दिया गया हो और भ्रष्टाचार पर रोक लगा दी गई हो। किन्तु इसके पीछे की कहानी यह थी कि निजी कम्पनी जो इन कम्प्यूटराइज्ड चौकियों का संचालन कर रही है को भारी लाभ कमाने का अवसर देना अगर इन कम्पनियों की तह तक जाया जाये तो आपको सत्तारूढ़ दल के कई नामी गिरामी चेहरे उजागर हो जायेगे। बहरहाल इस आदेश को विंध्य ट्रक आनर्स असोसिएशन एवं अन्य ने परिवहन मंत्रालय और परिवहन आयुक्त के इस आदेश को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी और ये बताया की परिवहन विभाग इस तरह अपने कानूनी अधिकार निजी लोगो जिनका की सरकार और जनता के प्रति कोई उत्तरदायित्व नही है को अपने अधिकार ट्रांसफर नही कर सकता। क्योंकि परिवहन विभाग अपने कर्मचारियों की नियुक्ति के लिये कई प्रकार की योग्यता के आधार पर नियुक्ति करता है जिसमे ऑटोमोबाइल इंजीनियर होना परिवहन क्षेत्र का विशेषज्ञ होना आदि है जबकी निजी कम्पनी के संचालको के पास इस प्रकार की कोई योग्यता नही होती। आखिरकार उच्च न्यायालय जबलपुर ने विंध्य ट्रक आनर्स असोसिएशन की बात को मानते हुवे मध्यप्रदेश सरकार को झटका देते हुवे परिवहन विभाग को उन चौकियों पर अपने कर्मचारियों को पुनः नियुक्त करने का आदेश दिया और निजी कम्पनी की लूट पर रोक लगा दी उच्च न्यायालय ने उक्त आदेश 4 सितम्बर को पारित किया। जिसके अमल के लिये परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव ने पूर्व के आदेशों को रद्द करते हुवे परिवहन चौकियों पर पुनः विभाग के लोगो की तैनाती के आदेश हेतु रास्ता प्रशस्त कर दिया।
