रतलाम। जिले के ग्राम बाजेडा में खबर पक्की की टीम ने पहुंचकर ग्रामीणों से उनको आ रही समस्याओं के बारे में जानकारी ली विगत 10 वर्षों से बरसात के दिनों में ग्राम बाजेड़ा का बरसाती नाला डेलनपुर से निकल कर बांगरोद गुणावद होकर मलेनी नदी में मिल जाता है। नाले से गांव और खेत दो भाग में बंट जाते हैं जिससे ग्रामीणों को अपने खेतो में और उस पार रहने वाले 5 परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण नदी के दोनों पाट पर वृक्ष से रस्सी बांधकर उस पर चलकर रास्ता तय कर रहे हैं स्कूल जाने वाले बच्चों को उनके परिजन अपनी पीठ पर बांधकर स्कूल तक पहुंचा रहे हैं। एक और प्रदेश सरकार जिले में विकास के नाम पर आने वाले चुनाव में आशीर्वाद लेने के लिए प्रदेश के मुखिया स्वयं रतलाम आ रहे हैं वहीं ग्रामीण क्षेत्र के आलम इस प्रकार है की ग्रामीण परेशान हो रहे हैं।जब टीम वहा पहुची तो एक 10वर्षीय बच्ची को उसके पिता पीठ से बांधकर रस्सी के सहारे जान जोखिम मे डालकर नाला पार कर रहे थे।
नाले के इस पार गांव है जिसमें निवासरत अनेको किसानों की जमीन नाले के उस पार है जो की लगभग 1000 बीघा के आसपास है उन्हें नाले में रस्सी के सहारे ही खेतों पर पहुंचना पड़ रहा है किसानों ने बताया कि प्रदेश सरकार एक और किसानों के हितों की बात करती है। वहीं दूसरी और किसान छोटी-छोटी सुविधा के लिए परेशान हो रहा है कई बार तहसीलदार पटवारी विधायक भी आकर यहां पर मौका मुआयना कर गए लेकिन उन्होंने आज तक इस नाले पर पुल बनाने की सूंघ नहीं ली।नाले के उस पार बाजेडा निवासी दारा सिंह सोलंकी भगवान सिंह सुरेंद्र सिंह सुमेर सिंह विद्वान सिंह राजेंद्र सिंह परमानंद जी बापू सिंह गोयल रमेश पांचाल भगवान सिंह बसंतीलाल कि 10 से 15- 15 बीघा जमीन है वही मोहन लाल शर्मा की 40 बीघा तथा नाथू चौधरी की 80 बीघा जमीन है जिन्हें उसे अपने खेतों में काम करने के लिए जाना पड़ता है।
6 बच्चे प्रतिदिन निकलते हैं रस्सी से
रितिका पिता ईश्वर सिंह 10 वर्ष, वेदिका पिता ईश्वर सिंह 12 वर्ष,प्रीति कुवर पिता राजेंद्र सिंह 13 वर्ष, महेंद्र सिंह पिता राजेंद्र सिंह 10 वर्ष, कृष्णपाल सिंह पिता सुमेर सिंह 5 वर्ष इन बच्चों को अपने परिजन पीठ से बांधकर प्रतिदिन ड्यूटी अनुसार नदी पार करवा कर स्कूल छोड़ने जाते हैं।
कई बार गिरे नाले मे।
ग्रामीणों के अनुसार विगत 10 वर्षों से अब तक कई बार रस्सी के सहारे निकलने में पैर फिसलने कारण नाले में गिर जाते हैं जिन्हें मामूली चोटें भी आई है लेकिन आखिर इन गरीबों की आवाज सुनने वाला कौन।
मानवता हुई शर्मसार
विगत 3 दिन पूर्व इसी नाले के पार रहने वाली एक गर्भवती महिला लाडकुँवर स्वयं रस्सी पर चलकर नाला पार किया और नामलीअस्पताल पहुंची और स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया दो दिन बाद उसे गांव भेज दिया। महिला दूसरे रास्ते से भी रस्सी पर चलकर बच्चे को अपने पति के पेट से बांधकर घर पहुची।
