रतलाम। जैन समाज की संस्था श्री धर्मदास मित्र मंडल की संपत्तियों को निजी ट्रस्ट बनाकर खुर्द–बुर्द किए जाने की शिकायत के मामले में ट्रस्ट के पदाधिकारियों की ओर से शुक्रवार को भी जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। इस प्रकरण में ट्रस्टों की ओर से जवाब देने पहुंचे एड्वोकेट ने केस को ही खारिज करने की अपील की। कहा- शिकायतकर्ता को केस दायर करने का अधिकार ही नहीं है। एसडीएम इस तर्क पर उखड़ गए, उन्होंने ताकीद किया है कि 11 दिसंबर तक यदि ट्रस्ट पदाधिकारियों की ओर से जवाब पेश नहीं किया गया तो मामले को एक पक्षीय घोषित कर दिया जाएगा।
श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल के वर्तमान पदाधिकारियों ने समाजजनों के साथ मिलकर पिछले दिनों कलेक्टर को समाज के ट्रस्ट की करीब 100 करोड़ रूपयों की संपत्ति को 6 अलग–अलग निजी ट्रस्टों के अधीन कर दिए जाने की शिकायत की थी। कलेक्टर के निर्देश पर रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट व एसडीएम शहर के न्यायालय में इस प्रकरण की सुनवाई चल रही है। एसडीएम शहर अनिल भाना ने शिकायत में उल्लेखित सभी 6 ट्रस्ट के पदाधिकारियों को 3 नवंबर को जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा था। इस दिन जवाब प्रस्तुत नहीं हो सका लिहाजा 24 नवंबर तक का समय दिया गया, 24 को भी जवाब नहीं दिया गया। ट्रस्टी महेंद्र चाणोदिया की ओर से एड्वोकेट श्री ब्रजेश शर्मा ने प्रकरण को खारिज करने के तर्क रखे। एसडीएम सह रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट अनिल भाना ने इन्हें 11 दिसंबर तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। मामले में मुख्य शिकायतकर्ता अजीत मेहता की ओर से एड्वोकेट श्री रामस्वरूप बैरागी, श्री राजेश कर्णधार ने भी अपने तर्क रखे। शिकायत में उल्लेखित ट्रस्ट के पदाधिकारियों को अब 11 दिसंबर तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। इस दिन सभी ट्रस्ट के पदाधिकारियों को संपत्ति के क्रय–विक्रय, अंतरण, ऑडिट रिपोर्ट, बैंक खातों की नकल आदि दस्तावेज सहित जवाब प्रस्तुत करना है।
