• Sun. Aug 16th, 2026

वन विभाग के अधिकारियों का कारनामा, कागज पर उगा दिए पेड़, 30 लाख के गबन की आशंका

BySurendra Jain

Nov 16, 2017

 

रतलाम। रतलाम जिले के वन विभाग में 30 लाख रूपए का घोटाला सामने आया है। वन विभाग के अधिकारियों ने कागजों पर ही औषधीय पौधों का जंगल उगा दिया और भुगतान भी जारी करवा लिया। शिकायत हुई तो जांच अधिकारियों ने भी क्लीन चिट दे दी, दूसरी बार फिर से जांच हुई तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। खुद वन मंडलाअधिकारी(डीएफओ) ने अपने प्रतिवेदन में लिखा है कि जांच अधिकारियों ने भी इस मामले में गलती की है। फिलहाल विभाग के एसडीओ सहित 3 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।

आरटीआई एक्टिविस्ट और भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, एल्डरमेन प्रभु नेका व भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक मधु शिरोडकर द्वारा आरटीआई में मांगी गई जानकारी के बाद इस घोटाले का खुलासा हुआ है। वन विभाग में हुए घपले के मामले में डीएफओ प्रफुल्ल फुलझरे ने एसडीओ भगवती पंवार(हाल ही में सेवा निवृत्त), रेंज ऑफिसर ए.के. नागोरिया और सैलाना में प्रोजेक्ट प्रभारी रही एक महिला अधिकारी के खिलाफ चार्ज शीट जारी की है। इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।

कैसे हुआ गबन

  • वन विभाग की कैंपा मद योजना के अतंर्गत अडवाणिया में 25 हेक्टेयर क्षेत्र में औषधीय पौधो को लगाने के लिए 2011-12 में मंजूरी मिली थी। इस प्रोजेक्ट पर वर्ष 2022 तक कुल 70 लाख रूपए खर्च किए जाने थे।
  • साल दर साल इसी बजट से प्रोजेक्ट के लिए 25 हेक्टेयर के खर्च के मान से ही रकम जारी की जाती रही। एक शिकायत के बाद जांच हुई तो पता चला कि रकम तो 25 हेक्टेयर में पौधे लगाने के लिए जारी हो रही है लेकिन मौके पर केवल 12.642 हेक्टेयर क्षेत्र में ही पौधारोपण हुआ है। इस समय तक कागजों पर ही अलग-अलग 27 लाख 35 हजार और 3 लाख 70 हजार रूपए खर्च किए जा चुके थे।
  • 642 हेक्टेयर क्षेत्र में चेनलिंक फेंसिंग से घेरना बताया गया लेकिन वास्तविक रूप से मौके पर केवल 2000 रनिंग मीटर फेंसिंग का ही काम हुआ।
  • 3 हेक्टेयर क्षेत्र में अलग से औषधी के पौधे तो रोपित मिले लेकिन चेनलिंक फेंसिंग का काम पूरा नहीं हो सका।

…………….

वर्शन- एसडीओ व अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट हो चुकी है। विभागीय जांच चल रही है। – प्रफुल्ल फुलझरे, डीएफओ रतलाम

You missed

error: Content is protected !!