रतलाम। बदलते मौसम और खस्ताहाल सड़कों ने शहर के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। पूर्व सिविल सर्जन और शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉक्टर के. सी. पाठक ने खबर पक्की से चर्चा में बताया कि बदलते मौसम में शहर की खराब सड़कों ने आग में घी का काम किया है। लोगों की बीमारियां बढ़ा दी है। धूल मिट्टी की वजह से एलर्जी के मरीजों की तादाद लगभग 40% बढ़ गई है जो चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर पहले इस तरह के मरीज 10 के करीब आते थे जो 20 से 25 हो गये हैं। इसके बारे में एक अन्य चिकित्सक डॉ. राजेश पाटनी ने बताया कि धूल मिट्टी की वजह से स्किन एलर्जी से खुजली दाफड़ सर्दी, जुखाम, हरारत, खांसी के मरीज काफी तादाद में बढ़ गये है। इससे दमा की बीमारी वालों को भी बहुत तकलीफ बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि इस तरह के मरीजों की संख्या 50 प्रतिशत ज्यादा हो गई है। खबर पक्की से बातचीत के दरमियान डॉक्टर पाटनी के यहां आई अभिभाषक सुनील जैन की पत्नी विपुला जैन ने बताया कि धूल मिट्टी की एलर्जी से उनको काफी परेशानी हो रही है और इसीलिए वह डॉक्टर को दिखाने आई है। नगर निगम चुनाव के वक्त जब डॉक्टर महापौर को चुना गया तब लोगों को बड़ी उम्मीद थी कि शहर के स्वास्थ्य के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान जाएगा। किंतु चुनी हुई परिषद और वर्तमान निगमायुक्त ने इस मामले में शहर को बेहद निराश किया है। लोगों को कहना पड़ रहा है अभी तक जितनी परिषद चुन के आई है उसमें सबसे निकृष्ट काम इस परिषद का रहा है। सत्तारूढ़ और विपक्षी पार्टियां यह दोनों के लिए आत्मावलोकन का समय है कि दोनों ही अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे है। शहर की खस्ताहाल सड़कों और बदहाल दुर्दशा से आम नागरिक के साथ-साथ महिलाओं बच्चों और छात्रों को जो पीड़ा उठाना पड़ रही है उस पीड़ा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। शहर के स्कूलों का सर्वे किया जाए तो हर कक्षा के 25% बच्चे इन कारणों से बीमार है। यदि जिम्मेदारों ने तुरंत इस पर ध्यान नहीं दिया तो इसका खामियाजा आगामी चुनाव में निश्चित रूप से भुगतना पड़ेगा।
