नईदिल्ली। प्रमोशन में आरक्षण मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला संवैधानिक पीठ के सुपूर्द कर दिया है। चीफ जस्टिस इस संवैधानिक पीठ का गठन करेंगे। सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले से मध्यप्रदेश सरकार ने भी राहत की सांस ली है। फिलहाल यह तय हो गया है कि इस विवादास्पद मसले का हल तत्काल तो नहीं निकल सकता है।
पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा मध्यप्रदेश सरकार के लिए पेशोपश की स्थिति वाला है। मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को लोक सेवा पदोन्नति नियम 2002 को खारिज कर दिया था। इस फैसले खिलाफ प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सार्वजनिक रूप से ऐलान कर चुके है कि पदोन्नति में आरक्षण समाप्त नहीं होगा और सरकार इसे जारी रखने के लिए हरसंभव कोशिश करेगी। मुख्यमंत्री का यह ऐलान दलित और पिछड़े वोटर्स को साधने के रूप में देखा गया लेकिन सवर्ण वर्ग की नाराजगी भी सहन करना पड़ी। प्रदेश की जातिगत राजनीति को हवा देने वाले इस विवादास्पद मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का बेसब्री से इंतजार था। अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस प्रकरण की सुनवाई संवैधानिक पीठ करेगी और चीफ जस्टिस इस पीठ का गठन करेंगे।
