रतलाम। जिला पंचायत की बैठक का बुधवार दोपहर कांग्रेस के सदस्यों ने बहिष्कार कर दिया। भाजपा समर्थित सदस्य नारायण मईड़ा ने भी इन्हीं का साथ दिया। आरोप था- अधिकारी सुनते नहीं तो बैठक किस बात की। इस बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष डी.पी. धाकड़ तो इतना तक कह गए- अधिकारी हम जनप्रतिनिधियों का मजाक बनाना बंद कर दे, वर्ना हम पब्लिक के बीच अधिकारियों का मजाक बना देंगे जो बहुत भारी पड़ेगा।
बुधवार को जिला पंचायत में सामान्य प्रशासन समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक की शुरूआत होते ही ज्यादतर सदस्यों ने पिछली बैठकों में हुए निर्णयों पर कार्रवाई का प्रतिवेदन मांगा। शुरूआत महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी सुषमा भदौरिया से हुई। भदौरिया का जवाब था-अगली बैठक में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इस जवाब पर कांग्रेस के सदस्य बिफर गए। आरोप लगाए कि जब कोई अधिकारी जनप्रतिनिधियों की सुनते ही नहीं तो बैठक किस बात की। जिपं उपाध्यक्ष डीपी धाकड़ के अनुसार पिछली बैठकों में महिला बाल विकास विभाग की एक अधिकारी को पद से हटाने का निर्णय लिया था, उसका पालन नहीं हुआ। जनपद अध्यक्ष बैठक में है लेकिन सीईओ गायब है। सचिवों के ट्रांसफर बगैर सामान्य प्रशासन समिति के सामने रखे ही कर दिए गए। जिला पंचायत में महीनों तक झाडू भी नहीं लगती। बैठकों में फैसले तो हो जाते है लेकिन अधिकारी उनका पालन ही नहीं करते ऐसे में एक ओर बैठक करके क्या करते। जिपं अध्यक्ष प्रमेश मईड़ा ने भी इसका समर्थन किया लेकिन सिर्फ सीईओ सोमेश मिश्रा को हिदायत देकर रह गए। भाजपा समर्थित जिपं सदस्य नारायण मईड़ा ने भी इस मामले में कांग्रेसी सदस्यों का साथ दिया, कहा- यहां आते है तो ऐसा लगता है जैसे कोर्ट में पेशी पर आए है। हालांकि कांग्रेसी सदस्यों के विरोध के बाद भी जिपं अध्यक्ष ने बैठक जारी रखी और कोरम पूरा नहीं होने के बावजूद विभागीय समीक्षाएं की।
