रतलाम। नगर निगम कार्यालय के ठीक पीछे हाथीखाना के नजदीक खाली पड़ी करीब 1 लाख वर्गफिट जमीन विवादों में पड़ गई है। इस जमीन को प्रशासन ने पुलिस विभाग के आवास बनाने के लिए रिजर्व घोषित किया है, इसके ठीक विपरीत अब खुद पुलिस विभाग ही इंडियन आईल कंपनी के साथ मिलकर यहां पेट्रोल पंप डालने की तैयारी में है। यहीं नहीं आइल कंपनी की ओर से प्रशासन को एनओसी के लिए जो आवेदन दिया गया है, उसमें भी गलत जानकारी दी गई है। बताया गया है कि जहां पेट्रोल पंप डाला जाना है वहां 24 मीटर चौड़ी सड़क है, हकीगत में मौके पर फिलहाल 8 मीटर से भी कम जगह है।
इस मामले में शहर के वकील राजेश कर्णधार द्वारा कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल को शिकायत की गई है। इस शिकायत में उल्लेख या गया है कि मोचीपुरा में अजाक थाने के पास की सरकारी सर्वे नंबर 382, 383 व 385 की जमीन पर पुलिस और इंडियन ऑयल कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से पेट्रोल पंप डाला जा रहा है। शहर के मास्टर प्लान व भूमी विकास नियम 2012 के तहत पेट्रोल केवल वहीं डाला जा सकता है जहां सामने की और सड़क की चौड़ाई 24 मीटर हो और किसी भी चौराहे से इसकी दूरी 100 मीटर होना चाहिए। मोचीपुरा में जिस जगह का चयन पेट्रोल पंप के लिए किया गया है वहां इन दोनों ही शर्तो का उल्लंघन होता है। इंडियन ऑयल कंपनी के अधिकारियों ने एनओसी के लिए इन दोनों ही बिंदुओ पर गलत जानकारी दी है। सबसे अहम बात यह है कि जिस जमीन पर पंप की एनओसी मांगी गई है वह जमीन अब भी रिकार्ड में राजस्व विभाग की है और पुलिस विभाग के आवास बनाने के लिए आरक्षित की गई है। खुद पुलिस विभाग भी इसका व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकता है। एड्वोकेट राजेश कर्णधार के अनुसार हमनें सारे तथ्यों से कलेक्टर को अवगत करा दिया है। यदि इसके बावजूद भी सरकारी तौर पर पंप के लिए एनओसी जारी की जाती है तो हम प्रकरण को न्यायालय में ले जाएंगे।