रतलाम। शहर में चल रहे सीवरेज प्रोजेक्ट के काम में शनिवार का कस्तूरबा नगर में भी विरोध हो गया। निगम में भाजपा का बोर्ड इसे प्रोजेक्ट को अपनी उपलब्धि बताता है लेकिन लेकिन शनिवार को खुद भाजपा के ही पार्षद ने सीवरेज लाइन का काम रूकवा दिया और डले हुए पाइप भी निकलवा दिए। पार्षद का कहना है कि ठेकेदार फर्म तय नियमों से काम नहीं कर रही है, इसके अलावा नगर निगम के स्तर पर भी प्रोजेक्ट की मानिटरिंग ठीक से नहीं की जा रही है।
वाकया सुबह करीब 11 बजे का है। कस्तूरबा नगर में जैन मंदिर के नजदीक सीवरेज लाइन डालने वाली फर्म के कर्मचारी खुदाई कर पाइप डाल रहे थे। पार्षद अरूण राव यहां पहुंचे और काम देखा तो नाराजगी जताने लगे। उन्होंने प्रोजेक्ट इंचार्ज और निगम के इंजीनियर्स से भी बात की और बाद में डले हुए पाइप भी बाहर निकलवा दिए। कहा- जब तक ठीक से काम नहीं करोगे, एक इंच भी खुदाई आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।
इन वजहों से आपत्ति
- निगम के साथ हुए अनुबंध के तहत ठेकेदार फर्म को एक बार में सड़क पर 250 मीटर के हिस्से में खुदाई करना है। पहले इस हिस्से में काम पूरा होगा, सडक दुरूस्त की जाएगी तब अगले हिस्से में खुदाई शुरू होगी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। ठेकेदार फर्म के कर्मचारी जल्दबाजी के चक्कर में अनाप-शनाप खुदाई कर रहे है।
- सीवरेज के पाइप डालने से पहले जमीन के नीचले हिस्से में पक्का बैस बनाने का भी अनुबंध में उल्लेख है लेकिन बिना बैस तैयार किए ही केवल मिट्टी पर ही पाइप डाले जा रहे है।
- पाइप डालने के बाद तत्काल ही सडक को दुरूस्त करने का प्रावधान है लेकिन केवल मिट्टी भरकर ही काम चलाया जा रहा है।
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- भगवान भरोसे प्रोजेक्ट
- शहर के किसी भी प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम की ओर से इंजीनियर्स तैनात किए जाते है, जहां काम होता है उस साइट का निरीक्षण करने के उपरांत नगर निगम के इंजीनियर अपनी जांच करते है और उसके बाद आगे काम बढ़ाया जाता है। रतलाम में सीवरेज के मामले में ठीक उल्टा है। पार्षद अरूण राव ने शनिवार को नगर निगम की ओर से प्रोजेक्ट के इंजीनियर श्याम सोनी से फोन पर बात की तो पता चला कि वे भोपाल है। सोनी ने बताया कि आयुक्त ने अनवर कुरैशी को इंचार्ज बनाया है, वे लंबी छुट्टी पर है। निगम के दूसरे इंजीनियर इस काम से खुद को दूर रखे हुए है। सवाल उठना लाजमी है कि शहर में यदि सीवरेज लाइन डल रही है तो नगर निगम की ओर से इसकी मानिटरिंग कौन कर रहा है। यहां यह बताना भी जरूरी होगा कि ठीक इसी तरह की स्थिति यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत शहर में डाली गई पेयजल पाइप लाइन के मामले में भी बनी थी और लाइन डलने के बाद तत्कालीन कलेक्टर बी. चंद्रशेखर ने दूसरे विभाग पीएचई से जांच कराई तो कई सारी लापरवाही सामने आई।
