खबर पक्की: 25 जुलाई नई दिल्ली, मोदी सरकार सेना की जमीन मामला में बड़ा नीतिगत बदलाव करने जा रही है। समाचार सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार ने इस पॉलिसी से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सार्वजनिक उपयोग के लिए सेना से जो जमीन ली जाएगी उसके बदले उतनी ही कीमत के अधोसंरचना निर्माण की इजाजत होगी। यानी सेना के स्वामित्व से जुड़ी जमीन को उतनी ही वैल्यू की जमीन देने के बदले या बाजार कीमत के भुगतान पर लिया जा सकेगा।
250 साल में पहली बार यानी सेना की जमीन से जुड़े मामले में 1765 के बाद पहली बार बदलाव किए जा रहे हैं। उस वक्त ब्रिटिश काल में बंगाल के बैरकपुर में पहली कैंटोनमेंट बनाई गई थी। तब अंग्रेजों ने यह नियम बनाया था कि सेना से जुड़ी जमीन को मिलिट्री के कामों के अलावा किसी और मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा । बाद में 1801 में ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर जनरल-इन-काउंसिल ने आदेश दिया था कि किसी भी कैंटोनमेंट का कोई भी बंगला और क्वार्टर किसी ऐसे व्यक्ति को बेचने की इजाजत नहीं होगी जो सेना से नहीं जुड़ा हो। पर मोदी सरकार जिस तरह सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश कर रही है उसी तर्ज पर सेना की जमीनों का भी विनिवेश किया जाएगा।
