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2 करोड़ के नोटों से सजा महालक्ष्मी मंदिर:40 देशों की करेंसी, सिल्वर के 52 हाथी भी; सोने-चांदी के जेवरों से किया श्रृंगार

BySurendra Jain

Nov 6, 2026

खबर पक्की, 6 नवंबर, रतलाम। रतलाम में महालक्ष्मी मंदिर को दो करोड़ रुपए के नोटों, 40 देशों की विदेशी करेंसी और सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया गया है। मंदिर में नोटों की गड्डियों से दीवारें, वंदनवार और पेड़ बनाए गए हैं। मां लक्ष्मी का श्रृंगार भी भक्तों के दिए नोटों और जेवरों से किया गया है। दीपावली पर धनतेरस से भाईदूज तक पांच दिन के लिए मंदिर को इस तरह सजाया जाता है। देशभर से भक्त यहां नकदी, सोने-चांदी के जेवर और तिजोरियां जमा कराते हैं। खास बात यह है कि पांच दिन बाद भक्तों को उनकी जमा की गई रकम और जेवर वापस लौटा दिए जाते हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी के दरबार में धन और आभूषण रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
दो हजार भक्तों ने जमा कराई राशि- मंदिर के पंडित अश्विनी पुजारी के मुताबिक, सजावट के लिए नोट जमा कराने का सिलसिला शरद पूर्णिमा से शुरू हो जाता है। इसके बाद नोटों की लड़ियां बनाने का काम शुरू होता है। धनतेरस पर तड़के शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके बाद मंदिर को भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। इस बार सजावट के लिए दो हजार भक्तों ने रुपए जमा कराए हैं।
नोटों के वंदनवार, गमले और पेड़ भी- मंदिर की सजावट एक रुपए से लेकर 500 रुपए तक के नोटों से की गई है। नोटों से वंदनवार और गमले बनाए गए हैं। इस बार नोटों का पेड़ भी तैयार किया गया है। इसके अलावा, 100 और 200 रुपए के नोटों से मोरपंख बनाए गए हैं। मंदिर की छत से लेकर दीवारों तक को नोटों के वंदनवार और गमलों से सजाया गया है।
भक्तों की ओर से दी गई विदेशी करेंसी और डॉलर को भी सजावट में शामिल किया गया है। इन्हें लेमिनेशन कर सुरक्षित तरीके से सजाया गया है। मंदिर के गर्भगृह में ढाई-ढाई किलो चांदी के पांच हाथी रखे गए हैं। इसके अलावा, चांदी के 52 छोटे हाथी भी रखे गए हैं। पहली बार चांदी के 45 सिक्कों से जड़ी साड़ी भी मंदिर के आकर्षण का केंद्र रहेगी। शरद पूर्णिमा से 35 लोगों की टीम मंदिर की सजावट में जुटी है। यह टीम हर साल नोटों के वंदनवार और सजावट के नए रूप तैयार करती है। कलाकार कपिल श्रोत्रिय पिछले तीन साल से मंदिर में सेवा दे रहे हैं। कपिल के मुताबिक, नोटों की लड़ियां बनाते समय पिन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। नोटों को एक-एक पॉलिथीन में पैक किया जाता है, ताकि वे सुरक्षित रहें। नोट मोड़ने पर भी कटते-फटते नहीं हैं। पांच दिन बाद नोटों को प्लास्टिक से निकालकर श्रद्धालुओं को लौटा दिया जाता है। नोटों के वंदनवार बनाने के लिए पिन का इस्तेमाल इसलिए नहीं करते, ताकि नोट खराब न हों। कई भक्त वही नोटों की गड्डियां दोबारा सजावट के लिए दे जाते हैं, जो पिछले साल जमा कराई थीं।
कलाकार ऐश्वर्य सोमानी ने बताया कि नोटों की लड़ियां बनाते समय काफी सावधानी रखनी पड़ती है। नोटों में सुई की नोक के बराबर छेद किया जाता है। धागे भी बहुत बारीक रखे जाते हैं। ज्यादा दबाव डालने पर नोट फट सकते हैं, इसलिए उन्हें सावधानी से पिरोया जाता है। ऐश्वर्य के मुताबिक, नोटों की क्वालिटी अच्छी होने से वे आमतौर पर फटते नहीं हैं। कुछ भक्त इन्हें घर ले जाकर पूजा में रखते हैं, जबकि कुछ नए नोटों को दोबारा बाजार में चलन में इस्तेमाल करते हैं। वे बताते हैं कि वे लंबे समय से मंदिर से जुड़े हैं। पहले परिवार के बड़ों को नोटों की लड़ियां बनाते देखते थे। उन्हीं से यह काम सीखा। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ा और अब यह काम आसानी से कर लेते हैं।

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