रतलाम। शहर के मुख्य मार्ग स्टेशन रोड की छत्रीपुलिया का एक हिस्सा रविवार सुबह गिर गया। यह पुलिया काफी जर्जर हालत में है। पिछले 6 साल से नगर निगम में इस पुलिया के नए निर्माण की कवायद चल रही है लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। इस पुलिया के निर्माण की कवायद में एक अलग ही कहानी सामने आई है, पिछले एक महीने से पुलिया के निर्माण के टेंडर नगर निगम में काफी विवादों में रहे है। दो बार सिटी इंजीनियर द्वारा टेंडर निरस्त करने और बाद में इसे स्वीकृति के लिए एमआईसी में रखने से पूरी प्रक्रिया ही शंका के घेरे में आ गई है। खास बात यह है कि इतना सब होने के बावजूद वर्क आर्डर जारी नहीं किया गया।
छत्रीपुल का जर्जर हिस्सा गिरने के बाद रविवार सुबह से ही यातायात पुलिस ने इस मार्ग से वाहनों का आवागमन डायवर्ट कर दिया है। पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया, वाहनों को आरडीए, गुलाब चक्कर, कोर्ट तिराहा होते हुए चलाया गया। अगले करीब दो महीने मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद ही रहेगा।
निरस्त होते होते स्वीकृत हुआ टेंडर
छत्रीपुल के दोबारा निर्माण के लिए नगर निगम ने एक महीने पहले दूसरी बार टेंडर कॉल किए थे। पहली बार के टेंडर में कोई ठेकेदार शामिल नहीं हुआ था। दूसरी बार में सांईराम कंस्ट्रक्शन संचालक अनूप धनोतिया का 14 प्रतिशत लोएस्ट टेंडर हुआ। सेकेंड लोएस्ट रामेश कंस्ट्रक्शन(18 प्रतिशत) का टेंडर था। काम की लागत निगम अधिकारियों ने 1 करोड़ 62 लाख रूपए तय की है। सांईराम का लोएस्ट टेंडर होने के बावजूद सिटी इंजीनियर जी.के. जायसवाल ने पहले रेट नहीं पूरने का हवाला देते हुए टेंडर निरस्त करने की अनुंसशा की। दूसरी बार में यह आपत्ति लगाई कि ठेकेदार फर्म को पुलिया बनाने का अनुभव नहीं है। सिटी इंजीनियर की आपत्ति के बाद मामला संबंधित ठेकेदार भाजपा के एक अन्य जनप्रतिनिधि के पास पहुंच गया, वहां से बात आगे बढ़ी और तीसरी बार में खुद जायसवाल ने ही अपनी आपत्तियों को वापस ले लिया। तर्क दिया गया कि 2 करोड़ से कम के काम में ये नियम लागू नहीं होते है। 2 दिन पहले ही इस टेंडर को एमआईसी में मंजूरी के लिए रखा गया। एमआईसी की मंजूरी भी हो गई लेकिन अभी वर्क आर्डर जारी नहीं किया गया है।
लेटर लगाते रहे पार्षद, किसी ने नहीं दिया ध्यान
छत्रीपुल का इलाका वार्ड क्रमांक 36 के पार्षद रणजीत सिंह परिहार का है। छत्रीपुल की जर्जर हालत के संबंध में वे अब तक कई बार नगर निगम आयुक्त को पत्र लिख चुके है। पार्षद परिहार यह आशंका पहले ही जता चुके थे कि यह पुलिया किसी भी दिन हादसे का सबब बन सकती है लिहाजा इसका पुर्ननिर्माण जल्द किया जाना उचित होगा।
