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कलेक्टोरेट में किसानों का प्रदर्शन, पढ़ी हनुमान चालीसा,फसल बीमा सहित 37 मांगो को लेकर पहुंचे थे

BySurendra Jain

Sep 15, 2026

खबर पक्की, 15 सितंबर, रतलाम। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में दावा राशि के भुगतान सहित 37 मांगों के निराकरण की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ के बैनर तले मंगलवार को जिलेभर से बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसान मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन लेकर आए थे, लेकिन उन्होंने कलेक्टर अजय कटेसरिया को ही ज्ञापन देने की मांग करते हुए कलेक्ट्रेट में धरना शुरू कर दिया।
मंगलवार को किसानों के कलेक्ट्रेट पहुंचने से कुछ देर पहले ही कलेक्टर अजय कटेसरिया बैठक लेकर कार्यालय से निकल गए थे। किसानों के आने के बाद डिप्टी कलेक्टर संजय शर्मा और नायब तहसीलदार रामचंद्र पांडेय ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन किसानों ने उन्हें ज्ञापन देने से साफ इनकार कर दिया। किसानों का कहना था कि वे कलेक्टर से मिलकर ही ज्ञापन सौंपेंगे।
दो घंटे इंतजार के बाद पढ़ी हनुमान चालीसा
दोपहर करीब 1 बजे से किसान कलेक्ट्रेट परिसर में डटे रहे। दोपहर 3 बजे तक कलेक्टर के नहीं आने पर किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। किसानों ने कहा कि जब तक कलेक्टर स्वयं आकर उनकी बात नहीं सुनेंगे, वे यहां से नहीं जाएंगे।शाम 6 बजे करीब एडीएम से चर्चा के बाद किसानों ने प्रदर्शन समाप्त किया।
फसल बीमा को लेकर सबसे बड़ा आक्रोश
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष ललित पालीवाल ने बताया कि किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि को लेकर है। उनका कहना है कि पिछली बार जिले को करीब 213 करोड़ रुपये की राहत राशि मिली थी, जबकि फसल बीमा के नाम पर केवल करीब 42 करोड़ रुपये की राशि मिली। उन्होंने दावा किया कि जिले की 15 ग्राम पंचायतों में बीमा राशि पहुंची, जबकि करीब 55 ग्राम पंचायतें इससे वंचित रह गईं।
किसानों ने मांग की कि सोयाबीन की राहत राशि और फसल बीमा से संबंधित पुराने सर्वे का दोबारा मिलान किया जाए और पात्र किसानों को पूर्ववत बीमा राशि का लाभ दिया जाए।
केला-मिर्च भी फसल बीमा में शामिल करने की मांग
किसानों की प्रमुख मांगों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत केला और मिर्च की फसलों को शामिल करना, बीमा दावा राशि के भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए पंजीयन शुरू करना शामिल है।इसके अलावा किसानों ने खरीफ की सभी प्रमुख फसलों, धान, मक्का, ज्वार और बाजार की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी शुरू करने की मांग भी रखी।
कृषि से लेकर बिजली और राजस्व तक 37 मांगें
ज्ञापन में केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं के संचालन की निगरानी के लिए जिला स्तर पर किसान प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए निगरानी समिति बनाने की मांग भी की गई है।
इसके साथ ही कृषि, सिंचाई, विद्युत और राजस्व से जुड़ी प्रदेश एवं स्थानीय स्तर की समस्याओं के निराकरण की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

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