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कोरोनावायरस और क्रूड के कहर से शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों ने गंवाए 7 लाख करोड़

BySurendra Jain

Mar 9, 2020

मुंबई। भारत सहित दुनियाभर में फैल रहे कोरोनावायरस का संकट शेयर बाजारों पर पूरी तरह हावी हो गया है। इसके असर से क्रूड के दाम तीन दशक के निचले स्तर पर चले गए। इसके बाद सोमवार को बीएसई और एनएसई पर इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट दिखी। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 2,467 टूट गया जबकि निफ्टी 600 से ज्यादा अंक लुढ़का। बाद में बाजार थोड़ा सुधरा तो लेकिन रिकॉर्ड गिरावट के साथ ही बंद हुआ।
दरअसल, कच्चे तेल के उत्पादन में रूस और सऊदी अरब के बीच सहमति नहीं बनने के बाद सऊदी प्रिंस ने तेल के दाम में बड़ी कटौती कर दी। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दिखा। भारतीय शेयर बाजार में बीएसई सेंसेक्स 1,941 अंकों या 5.17 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट के साथ 35,634.95 के स्तर पर बंद हुआ।
फीसदी के लिहाज से यह 11 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट है, जबकि सेंसेक्स डेढ़ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स का निचला स्तर जून 2018 में 35,622 रहा था, जबकि सेंसेक्स में सबसे बड़ी गिरावट 24 अगस्त, 2015 को 1,624.51 अंकों की रही थी।
एक दिन में गिरावट का भी रिकॉर्ड टूटा
इंट्राडे (एक दिन के भीतर) कारोबार में देखा जाए तो सेंसेक्स में 22 जनवरी 2008 को 2,273 अंकों की गिरावट आई थी, लेकिन सोमवार को यह रिकॉर्ड भी टूट गया।
निफ्टी का एक दशक में सबसे खराब दिन :
निफ्टी ने भी कारोबार के दौरान 600 से ज्यादा अंकों का गोता लगाया और आखिर में 538 अंक या 4.90 फीसदी के नुकसान के साथ 10,451.45 पर बंद हुआ। निफ्टी का यह अक्तूबर 2018 के बाद सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा निफ्टी में 2009 के बाद सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट भी दिखी है। निफ्टी के 50 स्टॉक में से सिर्फ 47 लाल निशान पर रहे।

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