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नकल शाखा में पदस्थ प्रीति यादव पर पैसे लेकर फर्जी डायवर्शन आदेश जारी करने का आरोप: जांच कर रहे हैं, एसडीएम शिराली जैन

BySurendra Jain

Apr 4, 2019

खबर पक्की: 4 अप्रैल, रतलाम ग्रामीण तहसील की नकल शाखा में कार्यरत प्रीति यादव द्वारा ₹10000 लेकर फर्जी डायवर्शन आदेश जारी करने का प्रकरण सामने आया है पूरे मामले का विवरण इस प्रकार है कि आवेदक श्रीमती संतोष बाई पति गोपाल राठौड़ जाति तेली पता निवासी ग्राम नामली द्वारा सर्वे नं. 786/7  रकबा 0.0 10 हेक्टेयर का डायवर्शन करवाने हेतू नामली में पदस्थ चौकीदार बसंती लाल के लड़के सोनू को ₹10000 दिए थे सोनू ने यह पैसे रतलाम ग्रामीण तहसील की नकल शाखा में पदस्थ प्रीति यादव को दिए जिसमें से प्रीति यादव ने ₹9000 रखकर 1000 सोनू को दे दिए और डायवर्शन करवाकर देने का कह दिया। कुछ दिन बाद सोनू डायवर्शन ऑर्डर लेने आया तो प्रीति ने उसको डायवर्शन ऑर्डर दे दिया। सोनू ने उक्त डायवर्सन ऑर्डर ले जाकर आवेदक श्रीमती संतोष पति गोपाल राठौड़ निवासी नामली को दे दिया। आवेदक श्रीमती संतोष राठौड़ द्वारा उक्त डायवर्शन ऑर्डर नामली पटवारी Rajesh माने को दिया ताकि वह खसरे में इंद्राज कर सके नामली पटवारी Rajesh माने ने उक्त ऑर्डर लेकर एसडीएम कार्यालय से अपनी कॉपी लेने की कोशिश की तो पता चला कि जावक रजिस्टर में ऐसे कोई आदेश का इंद्राज है ही नहीं इस पर उसने आवेदक को कहा कि यह आदेश फर्जी है और इस मामले में एसडीएम शिराली जैन को अवगत कराया एस डी एम शिराली जैन ने तुरंत मामले की गंभीरता समझते हुए आवेदक संतोष राठौड़, चौकीदार बसंती लाल के पुत्र सोनू जिसने ऑर्डर के बदले प्रीति यादव को पैसे दिए थे उसके और प्रीति यादव के बयान दर्ज करवाएं बताया जाता है कि प्रीति यादव बयान दर्ज कराते वक्त बुरी तरह रो रही थी। सोनू द्वारा दिए गये पैसे और प्रीति यादव द्वारा लिए गए पैसों में कुछ फर्क आ रहा है ऐसा बताया जा रहा है पर कुल मिलाकर पैसे लेकर फर्जी डायवर्शन आदेश जारी करने की बात सही साबित हुई है ऐसा सूत्रों से ज्ञात हुआ है इन आदेशों में एसडीएम के फर्जी सिग्नेचर किए गए है या डिजिटल सिगनेचर का उपयोग हुआ है इसकी जांच की जा रही है एसडीएम शिराली जैन से बात करने पर उन्होंने बताया कि अभी 3 लोगों के बयान दर्ज हुए है और पूरी जांच करने के बाद मामला स्पष्ट होगा कि इसमें कौन-कौन लिप्त है और इस आदेश के अलावा और कैसे इतने आदेश जारी हुए हैं। पूर्व में तहसीलदार वीरेंद्र कटारे द्वारा भी तहसील में आने वाले ग्रामीणों के साथ पैसे की मांग करने और अभद्र व्यवहार करने के कारण प्रीति यादव को कार्य से हटा दिया गया था किंतु पूर्व में भी प्रीति यादव द्वारा रो धोकर और माफी मांग कर आगे से ऐसी गलती ना होने के आश्वासन पर दया दिखाते हुए तहसीलदार कटारे द्वारा पुनः कार्य करने दिया जा रहा था किंतु दोबारा दिए गए इस मौके का फायदा उठाकर प्रीति यादव द्वारा पुनः वही गोरख धंधा शुरू कर दिया गया था अब पूरी नजरे एसडीएम शिराली जैन के ऊपर है कि वह अपने कार्यालय के नाम से जारी फर्जी हस्ताक्षर वाले डायवर्शन आदेश के मामले पर क्या कार्रवाई करती है।

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