खबर पक्की, 11 अगस्त, रतलाम। जनसुनवाई के नाम पर जिला मुख्यालय तक आने वाले आम लोगों की परेशानी कम करने के लिए कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिले की पूरी जनसुनवाई व्यवस्था को ही बदल दिया है। अब हर शिकायत के लिए फरियादी को रतलाम कलेक्टोरेट की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। जिस इलाके की समस्या है, उसी इलाके के सक्षम सरकारी कार्यालय में हर मंगलवार उसकी सुनवाई होगी।
कलेक्टर ने जनसुनवाई के केंद्रीकृत सिस्टम को खत्म कर इसका विकेंद्रीकरण कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मंगलवार सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक जिला मुख्यालय के साथ-साथ अनुविभाग, तहसील, विकासखंड, जनपद पंचायत, नगरीय निकाय और अन्य विभागीय कार्यालयों में जनसुनवाई होगी। खास बात यह है कि केवल आवेदन लेने की औपचारिकता नहीं होगी। संबंधित कार्यालय प्रमुख को स्वयं मौजूद रहकर लोगों की समस्याएं सुननी होंगी और जहां संभव हो, मौके पर ही निराकरण करना होगा।
अब तक जिले के दूरदराज गांवों से लोग छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचते रहे हैं। इसके लिए किसान, मजदूर, महिलाएं, बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर लोग समय और पैसा खर्च करते थे।
लेकिन प्रशासन की समीक्षा में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई—जिला जनसुनवाई में आने वाले अधिकांश आवेदन आखिरकार उसी तहसील, जनपद, नगरीय निकाय या संबंधित विभाग को भेजे जाते हैं, जहां से समस्या जुड़ी होती है।यानी पहले फरियादी जिला मुख्यालय आया, आवेदन दिया और फिर वही आवेदन वापस स्थानीय कार्यालय भेज दिया गया।
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अब व्यवस्था को उलट दिया है। पहले समस्या के स्तर पर समाधान होगा, जरूरत पड़ी तभी मामला जिला स्तर तक पहुंचेगा।
नई व्यवस्था में हर आवेदन का पंजीयन अनिवार्य होगा। आवेदक को पावती दी जाएगी और आवेदन पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।यानी अब यह देखना भी संभव होगा कि आवेदन आया कब, उस पर कार्रवाई क्या हुई और उसका अंतिम निराकरण कब हुआ।
सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि जिस शिकायत का समाधान स्थानीय अधिकारी कर सकता है, उसे केवल औपचारिकता के लिए जिला मुख्यालय नहीं भेजा जाएगा।जिला स्तर पर वही मामले जाएंगे, जिनमें कलेक्टर स्तर के हस्तक्षेप, विभिन्न विभागों के समन्वय, नीतिगत निर्णय या किसी बड़े प्रशासनिक निर्णय की जरूरत होगी।
अधिकारी नहीं बच सकेंगे ‘आवेदन आगे भेजनेÓ की आदत से
कलेक्टर के आदेश का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा अधिकारियों के लिए है। जनसुनवाई में आवेदन लेकर उसे दूसरे कार्यालय में भेज देना और जिम्मेदारी खत्म समझ लेना अब स्वीकार नहीं होगा।कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि अनावश्यक विलंब और केवल एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में आवेदन अग्रेषित करने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला स्तर से जनसुनवाई की मॉनिटरिंग होगी। अधिकारियों की मौजूदगी और शिकायतों के निराकरण की स्थिति का आकस्मिक सत्यापन भी कराया जा सकेगा।
नई व्यवस्था में प्रत्येक कार्यालय में जनसुनवाई का स्थान तय होगा। सूचना-पटल पर जनसुनवाई का दिन और समय भी प्रदर्शित करना होगा।हर मंगलवार सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तकनागरिक अपनी समस्या लेकर संबंधित कार्यालय पहुंच सकेंगे।
व्यवस्था में बदलाव निश्चित रूप से बड़ा है, लेकिन इसकी सफलता का असली पैमाना आदेश नहीं बल्कि मैदान में उसका अमल होगा।क्या अधिकारी हर मंगलवार समय पर अपने कार्यालय में मौजूद रहेंगे? क्या स्थानीय स्तर पर वास्तव में मौके पर समस्याओं का निराकरण होगा? क्या फरियादी को फिर उसी शिकायत के लिए अगले कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे? और क्या आवेदन को आगे बढ़ाकर जिम्मेदारी टालने की पुरानी कार्यशैली पर वास्तव में अंकुश लगेगा?इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे।
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने बदली जनसुनवाई की व्यवस्था, अब हर समस्या के लिए नहीं आना होगा कलेक्टोरेट,हर मंगलवार तहसील से लेकर नगर निकाय तक होगी जनसुनवाई
