रतलाम। मुख्य सचिव एसआर मोहन्ती ने भोपाल एनआईसी कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश के समस्त संभागायुक्तों एवं कलेक्टरों को निर्देश दिये कि उपार्जन केन्द्रों पर किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिले, यह सुनिश्चित किया जाये। अच्छी औसत गुणवत्ता की उपज समर्थन मूल्य से कम पर विक्रय न हो। किसी भी स्थिति में गुणवत्ताविहीन उपज नहीं खरीदी जाये। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिये बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जायें। ग्राम पंचायतों एवं उपार्जन केन्द्रों पर समर्थन मूल्य खरीदी सम्बन्धी शासन के निर्देशों के फ्लेक्स लगाये जायें, ताकि किसानों को फसलों की खरीदी की सामान्य जानकारी हो सके।
इस अवसर पर रतलाम एनआईसी कक्ष में कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, सीईओ जिला पंचायत सोमेश मिश्रा, अपर कलेक्टर जितेन्द्र सिंह चौहान, जिला खाद्य अधिकारी विवेक सक्सेना, डीआर सीएस परमानंद गडरिया, जिला विपणन अधिकारी सुश्री स्वाति राय, उपसंचालक कृषि जी.एस मोहनिया तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्य सचिव ने वीसी के माध्यम से संभागायुक्तों एवं कलेक्टर्स को निर्देश दिये कि अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत किसानों से कहा जाये कि वे एसएमएस मिलने पर निर्धारित दिन ही अपनी उपज उपार्जन केन्द्रों पर विक्रय हेतु लायें, ताकि उपार्जन केन्द्रों पर सुविधापूर्वक उपज क्रय की जा सके। उन्होंने निर्देश दिये कि उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिये पार्किंग, शेड, शौचालय, स्वच्छ पेयजल आदि बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाये। इस हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार भी होना चाहिये और उपार्जन केन्द्रों एवं ग्राम पंचायत स्तर पर फ्लेक्स लगाये जायें। उपार्जन केन्द्रों पर लगाई गई पंजीयन खिड़की पर कम्प्यूटर कार्य लगातार होना चाहिये। इस कार्य में ढिलाई न बरती जाये। उपार्जन केन्द्रों, मंडियों आदि में चाक-चौबन्द व्यवस्था की जाये। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिये हैं कि वे उपार्जन केन्द्रों पर की जा रही गतिविधियों की प्रतिदिन मॉनीटरिंग करें और कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि एफएक्यू गुणवत्ता की उपज एमएसपी से कम पर विक्रय न हो। हम्माल एवं तुलावटी की दरें अधिसूचित की जायें। मंडी में गेहूं उपार्जन हेतु समितियों को प्लेटफार्म एवं भण्डारण के लिये गोदाम उपलब्ध कराया जाये। किसानों की सुविधा के लिये उपार्जन केन्द्रों पर जलपान एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाना सुनिश्चित करें। मंडी में खरीदी की प्रभावी व्यवस्था हो। किसानों को मंडी में गेहूं विक्रय हेतु प्रोत्साहित किया जाये।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिये हैं कि सीमावर्ती जिलों पर विशेष सावधानी बरती जाये। सीमावर्ती उपार्जन केन्द्रों पर विशेष टीम की तैनाती की जाये। अवैधानिक खाद्यान्न के परिवहन/बिक्री पर सख्त कार्यवाही की जाये। समय-समय पर दस्तावेजों एवं खाद्यान्न स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया जाये। अन्तरराज्यीय नाकों पर वाहनों की चौकसी की जाये। वीसी में पॉवर पाइन्ट प्रजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी गई कि अपने-अपने जिलों में किसानों को अपनी उपज का विक्रय करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इस हेतु पर्याप्त उपार्जन केन्द्र खोले जायें। उपार्जन केन्द्रों की व्यवस्था की सतत समीक्षा की जाये। उपार्जन केन्द्रों पर प्रत्येक दिवस की उपज की आवक की प्रविष्टि की जाये एवं परिवहन की सुनिश्चितता हो।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि दिये गये निर्देशों का किसानों के हित में सकारात्मकता के साथ पालन किया जाना सुनिश्चित करें। उपार्जन केन्द्रों पर किसी प्रकार की किसानों को समस्या न हो। कानून व्यवस्था न बिगड़े, यह भी सुनिश्चित किया जाये।
उल्लेखनीय है कि उज्जैन संभाग में 3 लाख 31 हजार 974 किसानों का रबी सीजन में पंजीयन हुआ है। इसमें गेहूं के लिये 2 लाख 78 हजार 798, चना फसल के लिये 1 लाख 48 हजार 565, मसूर उपज के लिये 23 हजार 287 एवं सरसों के लिये 21 हजार 108 किसानों ने पंजीयन करवाया है। उज्जैन जिले में कुल 73 हजार 345, मंदसौर जिले में 61 हजार 695, शाजापुर जिले में 51 हजार 432, देवास जिले में 51 हजार 243, रतलाम जिले में 37 हजार 133, नीमच जिले में 31 हजार 244 एवं आगर मालवा जिले में 25 हजार 882 किसानों ने पंजीयन कराया है। संभाग के सभी जिलों में स्थापित केन्द्रों पर मंगलवार 26 मार्च से खरीदी प्रारम्भ हो गई है।
नॉन एफएक्यू उपज नहीं खरीदी जाये, वीसी के माध्यम से मुख्य सचिव ने दिये निर्देश
