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सैलाना की घटना पुलिस द्वारा एहतियाती कदम ना उठाने का परिणाम

BySurendra Jain

Mar 19, 2019

संपादकीय…

खबर पक्की: कल सुबह सैलाना में ट्रक जलाने की घटना पुलिस द्वारा एहतियाती कदम ना उठाने का परिणाम है। जब 1 दिन पहले शाम को 8:00 बजे दुर्घटना हो चुकी थी और उसमें एक महिला की मृत्यु होने के उपरांत भी दुर्घटना स्थल से ट्रक को ना हटाया जाना सीधे-सीधे पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है। एक तरफ पुलिस चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर छोटे-छोटे दोपहिया को रोक कर जांच कर रही है और आम आदमी का केश गिनने में और उसका हिसाब पूछने में लगी हुई है, वहीं दूसरी ओर ट्रक से दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के उपरांत भी इतनी गंभीर घटना को गंभीरता से ना लेते हुए दुर्घटना स्थल से ट्रक को जप्ती में ना लेकर थाने ना लाते हुए वहीं रहने दिया गया ।जिसकी परिणति यह हुई कि दुर्घटना स्थल पर भारी भीड़ का जमावड़ा हो गया। शाम को 8:00 बजे की घटना के पश्चात सुबह साढ़े 5 से 6 बजे के बीच एकत्रित भारी भीड़ ने ट्रक को आग लगा दी और पास में पेट्रोल पंप होने की वजह से पुलिस को पांच जगह से फायर लारिया बुलवाना पड़ी। पुलिस और प्रशासन द्वारा इस आगजनी को रोकने के लिए जब प्रयत्न किया गया तो उन पर पत्थर बरसने लगे इसमें फायर लारी के कांच फोटो और एक एएसआई और फायर लारी के कर्मचारी को घायल होना पड़ा। दुर्घटना के बाद 9 घंटे तक दुर्घटना स्थल से ट्रक को ना हटाया जाना सीधे-सीधे पुलिस की लापरवाही को इंगित करता है और इसी लापरवाही के कारण दुर्घटना स्थल पर इतनी भीड़ इकट्ठी हुई ।परिणाम स्वरूप ट्रक को आग लगा दी गई और पत्थरबाजी में शासकीय कर्मचारियों को घायल होना पड़ा। पुलिस जितनी तत्परता से आचार संहिता के नाम पर टू व्हीलर और फोर व्हीलर को रोककर जांच तलाशी ले रही है अगर उतनी ही तत्परता इस गंभीर दुर्घटना में दिखाती तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था। दुर्घटना स्थल के बाद सैलाना के लोगों से की गई बातचीत के आधार पर नतीजा यही निकलता है कि इस घटना का कारण सीधे सीधे पुलिस की लापरवाही रहा है और इसी कारण अनपढ़ आदिवासियों को इस दर्ज मुकदमें के कारण कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेगे ।यह तो शुक्र है ऊपर वाले का की कानून और व्यवस्था की स्थिति ज्यादा नहीं बिगड़ी वरना पुलिस को गोली भी चलाना पड़ सकती थी जिससे पूरे प्रदेश में एक गलत संदेश जाता।

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