खबरपक्की:31 जनवरी की पत्रकार वार्ता में कलेक्टर ने अपने द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट जो की अनुविभागीय अधिकारी जावरा एम एल आर्य द्वारा कलेक्टर को दी गई थी के आधार पर सभी पत्रकारों को यह बताया गया था आश्रय गृह में बालिकाओ के साथ शराब पीकर रचना भारतीय मारपीट करती थी और उनके साथ यौन शोषण होता था इस कारण वर्तमान में एक बालिका गर्भवती है। अब आज 5 फरवरी को एसपी गौरव तिवारी का यह स्टेटमेंट की बालिकाओ के साथ कोई बलात्कार की घटना नही हुई प्रशासन की पूरी जांच रिपोर्ट को कठघरे में खड़ा कर रहा है 24 जनवरी की घटना की जाँच रिपोर्ट 31 जनवरी को आती है अर्थात सातवे दिन उसी दिन अपराधी गिरफ्तार हो जाते है अगले दिन उन्हें कोर्ट में पेश किया जाता है पुलिस के द्वारा कोई रिमांड नही माँगा जाता है मिडिया में और जनता में पुलिस की कार्यवाही पर सवाल खड़े होते है तो पुलिस कोर्ट से अपराधियो का रिमांड मांगती है, रिमाण्ड में लेने के बावजूद पुलिस अपराधियो से कुछ भी नही उगलवा पाती है और 5 तारीख को मेडिकल रिपोर्ट के हवाले से पुलिस कहती है की कोई बलात्कार नही हुवा। अब मिडिया और जनता के लिए दुविधा यह है कि यदि कोई बलात्कार नही हुवा तो कलेक्टर ने किस आधार पर पत्रकारों को यौन शोषण और उस कारण एक लड़की के गर्भवती होने की बात कही इससे तो पूरी जांच पर ही सवाल खड़े हो रहे यदि कलेक्टर को जाँच रिपोर्ट गलत मिली तो पूरी जांच समिति बर्खास्त होना चाहिए और यदि जाँच रिपोर्ट सही है तो एसपी के दावे पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है अब सरकार की साख पर सवाल खड़े होंगे की पुलिस और प्रशासन के दावे एक दूसरे के विपरीत कैसे कही तो कुछ गड़बड़ है ? सब लड़कियों को भी तीतर बितर कर दिया गया है अब खबर नवीसों को लिए चुनोती है कि कैसे मासूमो के गुनहगारो तक कानून का शिकंजा कसे मेरा तो यही मानना है कि भगवान के घर देर है अंधेर नही।
