खबरपक्की: जिला महिला बाल विकास अधिकारी सुषमा भदौरिया की हिम्मत की दाद देना पड़ेगी जावरा कुंदन कुटीर आश्रयग्रह के बालिका यौन शोषण मामले में कलेक्टर की अनुशंसा पर कार्य में लापरवाही के आरोप में सम्भागयुक्त द्वारा निलंबित की गई सुषमा भदौरिया द्वारा जिले भर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ को आज अपने पक्ष में पैरवी करने और ज्ञापन देने सुबह 11 बजे सर्किट हाउस भेज दिया था जिससे वो सुषमा के पक्ष में बाल संरक्षण आयोग को ज्ञापन दे कर यह बता सके की हमारी मैडम तो दूध की धुली है। किन्तु आयोग के सदस्यों ने इनसे बात करने से इंकार कर दिया। बाद में महिला बाल विभाग की प्रभारी लक्ष्मी गामड़ मेडम ने इनकी बात सुनी। यह जिले में अधिकारी कर्मचारियों की अनुशासन हीनता की पराकाष्ठा है की तमाम लापरवाहियों और भृष्टआचरण के बावजूद यही डटे रहने और अपने को सही साबित करने के लिये इस तरह से दबाव बनाने के लिये अपने मातहत कर्मचारियों की भीड़ इकट्ठी कर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सरकार और प्रशासन को खुले आम चुनोती दे रही है। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार और प्रशासन ने इनकी अनुशासनहीनता को गम्भीरता से नही लिया तो आने वाले समय में ये सरकार के गले की हड्डी बनेगे।
