खबर पक्की: रतलाम। मालवा की भूमि में सबसे पहले काल गणना हुई और आज भी रतलाम ही पूरे देश के पंचागों को एक जाजम पर बैठाकर विषमताओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है। यह प्रयास सिर्फ रतलाम से ही हो सकता है क्योंकि यहीं के ज्योतिषविदों ने यह मुश्किल काम करने की कोशिश शुरु की है। रतलाम में दो दिनों तक होने वाले सम्मेलन में जो निष्कर्ष निकलेगा उससे हम कोशिश करेंगे कि समिति पूरे भारत में चार विभागों में बंटेगी। समिति देश भर के अलग-अलग पंचागों में तिथियों को लेकर होने वाले भ्रम को दूर करने के लिए एकरूपता लाएगी ताकि आम जन में पंचाग और तिथियों को लेकर उत्पन्न होने वाला विरोधाभास समाप्त हो सके।ज्योतिष गणना के अनुसार भविष्य में रतलाम औद्योगिक नगर के रूप में तेजी से विकसित होगा ।
यह बात उत्तराखंड के पूर्व वनमंत्री एवं उत्तराखंड संस्कृति एकेडमी के पूर्व उपचेयरमेन एवं ज्योतिषी डॉ. नंदकिशोर पुरोहित ने कही वे यहां अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन में आए थे और नारायणी पैलेस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
