खबर पक्की: वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ के महामंत्री जे जी माहुरकर ने आज एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार किसी की भी नहीं सुनती है 2014 के बाद से रेलवे में एक भी नियुक्ति नहीं की गई है। पैसेंजरो की सुरक्षा को ताक पर रखा जा रहा है। रेलवे के सुरक्षा हेतु 140000 पद खाली पड़े हैं किंतु पिछले 4 वर्षों में उनको भरने की कोशिश नहीं की जा रही है इस कारण समय पर मेंटेनेंस नहीं हो पा रहा है हर साल 500 से 600 रेलकर्मी दुर्घटना में मारे जा रहे हैं सभी रेल कर्मचारी बहुत ही तनावपूर्ण वातावरण में काम कर रहे हैं उन्हें छुट्टियां मंजूर नहीं होती है छुट्टी नहीं मिलने के कारण गुजरात में छठ पर्व मनाने के लिए जाने से मना करने पर रेल करने की पत्नी ने अपने 3 साल के बेटे को गला घोट के मार डाला और खुद ने फांसी लगा ली तो आप सोच सकते हो कि कितने भयावह और तनावपूर्ण स्थिति में रेल कर्मचारी काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि माल गाड़ी चलाने वाले और राजधानी और मेल चलाने वाले ड्राइवरों का ग्रेड पे एक है जो किसी भी तरह उचित नहीं है मेल और एक्सप्रेस ट्रेन चलाने वाले ड्राइवर कितने दक्षता और तनाव को झेलते हुए अपने काम को अंजाम देते हैं इसलिए उनका ग्रेड पे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रेलवे कर्मचारियों को नई पेंशन स्कीम से मुक्त करना चाहिए इस पेंशन स्कीम के कारण भी रेल कर्मचारियों और उसका परिवार हमेशा तनाव में रहता है। रेल बजट को वित्त बजट में मिलाने से रेलवे का नुकसान हुआ है और रेल कर्मचारी अपनी मांगों के लिए वित्त मंत्रालय का मोहताज हो गया है उन्होंने कहा कि रेलवे सेफ्टी कैटेगरी के 140000 पदों को भरने के लिए अगर जल्द ही कुछ नहीं करता है तो रेल कर्मचारियों के लिए एकमात्र रास्ता हड़ताल का ही बचेगा एक उदाहरण के द्वारा उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं करने के कारण और सेफ्टी जैसे कामों को भी आउटसोर्स करने के लिए देने के कारण रेलवे में दुर्घटना बढ़ती जा रही उन्होंने बताया कि ट्रैक मेंटेनेंस का काम प्राइवेट लोगों को देने के कारण बड़ौदा के अंदर एक ठेकेदार द्वारा बगैर ब्लॉक लिए ट्रैक को खोल दिया गया क्योंकि उसके 300 लोगों की मजदूरी का भुगतान करना पड़ रहा था और दुर्घटना का मत्था बाद में सेफ्टी इंस्पेक्टर के ऊपर फोड़ने की कोशिश हो रही थी जिसको मैंने बचाया था। माहुरकर ने कहा कि जब मैं 1958 में रेलवे में भर्ती हुआ तब 1800000 रेल कर्मचारी काम करते थे और आज यह घटते घटते 1300000 कर्मचारी रह गए हैं। जबकि उसके बाद सैकड़ों हजारों लाइनों का विस्तार हुआ है गाड़ियों की संख्या कई गुना बढ़ गई है उसके हिसाब से स्टाफ बढ़ना चाहिए था लेकिन हर साल स्टाफ कम किया जा रहा है।
