खबर पक्की: रतलाम जिले में डेंगू के बढ़ते मरीजों की संख्या से घबराए स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू मरीजों के आंकड़े कम करने के लिए नया रास्ता निकाला है मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी प्रभाकर नानावरे ने 15 November 2018 को जारी पत्र के अनुसार सभी डेंगू की जांच करने वाली लैब को मेक एलाइजा मशीन/ पीसीआर मशीन द्वारा की गई जांच को ही डेंगू के मामले में मानने के लिए निर्देशित किया है और उसके लिए भारत सरकार के निर्देशों का हवाला दिया है लेकिन इस हवाले के पत्र क्रमांक कौन सी तारीख को यह पत्र भारत सरकार ने जारी किया है उसका कहीं नामोनिशान पत्र में नहीं है। नगर में खून की जांच करने वाली कई लैब के मालिक को से खबर पक्की ने चर्चा की इस पर उन्होंने बताया कि ऐसा कोई निर्देश भारत सरकार के द्वारा जारी नहीं किए गए हैं जारी किए गए होते तो हमको भी पता होता हम जिस मेथड से जांच कर रहे हैं वही मेथड पूरे प्रदेश में सभी लैब वाले अपनाते हैं इस तरह के निर्देश खाली रतलाम जिले में ही जारी किए गए है और कहीं पर भी नहीं है। बहुत सारे लेब संचालकों ने बताया कि इस तरह के निर्देशों के कारण अब हम डेंगू की जांच हमारी लैब में नहीं करेंगे कायदे से हमारी जांच के बाद मान लीजिए सौ टेस्ट में बीस टेस्ट डेंगू पॉजिटिव के आते हैं तो उनको कन्फर्मेशन के लिए जिला अस्पताल में उनको दुबारा से उनकी बताएं मेथड से जांच करना चाहिए अब यदि अगर हमने जांच करना बंद कर दी तो सारे लोग जिला अस्पताल में ही जाएंगे और उससे जिला अस्पताल की व्यवस्था बद से बदतर होगी। मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के इस तरह के तुगलकी आदेश से यदि निजी लैब वालों ने डेंगू की जांच करना बंद कर दी तो संभव है डेंगू बिगड़ने से कई मरीजों की मौत हो जाए। क्योंकि डेंगू का समय रहते इलाज होने पर ही मरीज जल्दी अच्छा हो सकता है अन्यथा बिगड़ने पर डेंगू बहुत जानलेवा है जिला प्रशासन को मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के इस पत्र को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यह मात्र डेंगू के आंकड़ों को कम करने के लिए की गई कवायद ज्यादा नजर आता है बजाएं मरीजों की चिंता के।
