खबर पक्की: लेटलतीफी के कारण नाराज यास्मिन द्वारा कांग्रेस का टिकट ठुकरा दिए जाने के बाद, और पारस दादा द्वारा टिकट की भीख नहीं मांगे जाने के बयान के बाद अब कांग्रेस के पास विकल्प कम बचे है और उसे अनिल झालानी या प्रेम लता दवे में से किसी एक को टिकट फाइनल करना पड़ेगा। रात को कांतिलाल भूरिया और दीपक बावरिया ने यास्मिन शेरानी के घर पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रभु राठौड़ को भेजा था उन्होंने काफी कोशिश की लेकिन यास्मीन शेरानी टस से मस नहीं हुई और सच भी है किसी के स्वाभिमान के साथ खेल कर इस तरह टिकट दिया जाना उचित भी नहीं लगता 2 दिन पूर्व खुद दीपक बावरिया ने फोन करके कहा था कि आप का टिकट फाइनल कर दिया है और उसके बाद 2 दिन तक अनाउंस नहीं करने और बाजार में तरह-तरह की चर्चा चलने से यास्मीन शेरानी कि साफ-सुथरी छवि को धक्का लग रहा था। और जनता में बार-बार यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि यास्मीन कमजोर उम्मीदवार है और यह भाजपा के प्रत्याशी द्वारा मैनेज किया गया टिकट है और इसके लिए काफी लंबा लेनदेन हुआ है, इसके लिए टिकट को अनाउंस करने में देर हो रही है इसी से नाराज होकर यासमीन ने नहीं लड़ने का फैसला किया।
