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GST का अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो घबराए नहीं, तीसरा विंडो 25 जून को खुलेगा

BySurendra Jain

Jun 15, 2017

नई दिल्ली। अगर आपने गुरुवार को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) एनरॉलमेंट की दूसरी डेडलाइन मिस कर दी है तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। जीएसटीएन ने कहा है कि वह 25 जून को एनरॉलमेंट के लिए तीसरी विंडो ओपन करेगा। इसके पांच दिनों बाद 1 जुलाई को देश भर में जीएसटी लागू हो जाएगा।

जीएसटीएन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ‘जीएसटी बहुत बड़ा बदलाव है। ऐसे में टैक्सपेयर्स को नए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ज्वाइन करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।’ मौजूदा वैट, सर्विस टैक्स और सेंट्रल एक्साइज टैक्स के तहत आने वाले 80 लाख में से तीन चौथाई ट्रेडर्स जीएसटी के तहत रजिस्टर हो चुके हैं। अब तक जीएसटी एनरॉलमेंट के दो राउंड हुए हैं, जिसमें पहला 8 नवंबर 2016 से शुरू होकर 30 अप्रैल 2017 तक चला था। दूसरा राउंड 15 जून को बंद हुआ और इसे 1 जून को ओपन किया गया था। पहले राउंड में करीब 60 लाख टैक्सपेयर्स ने एनरॉलमेंट कराया था, जबकि दूसरे राउंड में 4 लाख से अधिक ट्रेडर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

कुमार ने कहा, ‘जो ट्रेडर्स किसी वजह से अभी तक एनरॉलमेंट नहीं करा पाए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। हम 25 जून को एनरॉलमेंट के लिए एक और विंडो ओपन करेंगे।’ जीएसटीएन का दावा है कि एनरॉलमेंट प्रोसेस में 15-20 मिनट से अधिक वक्त नहीं लगता।

जीएसटी को आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म बताया जा रहा है। इससे पूरा देश सिंगल मार्केट में बदल जाएगा। अभी बिजनेस एंटिटीज पर कई टैक्स लगते हैं। नए टैक्स के लागू होने के बाद उन्हें सिर्फ जीएसटी का भुगतान करना होगा। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जीएसटी को 1 जुलाई से लागू किया जाएगा और कोई भी इसे टाले जाने की उम्मीद कर रहा है तो वह गलत है। इस सिस्टम के लिए टेक्नोलॉजी मुहैया कराने वाले जीएसटीएन ने कहा कि वह किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए दिन-रात काम कर रहा है। जीएसटीएन ने जीएसटी के लिए एक पोर्टल बनाया है, जो हर महीने 32 अरब ट्रांजैक्शंस हैंडल कर सकता है।

सभी टैक्सपेयर्स, जिनके पास वैलिड पैन कार्ड है और जो अभी किसी राज्य या केंद्रीय टैक्स के लिए रजिस्टर्ड हैं, वे जीएसटी के दायरे में आ जाएंगे। एनरॉलमेंट प्रोसेस के तहत उन्हें नए टैक्स सिस्टम में शिफ्ट किया जा रहा है। जीएसटी कॉमन पोर्टल से टैक्सपेयर्स को जीएसटी कंप्लायंट रिक्वायरमेंट पूरी करने में मदद मिलेगी। वे इसके जरिये रिटर्न फाइल कर सकेंगे और टैक्स का भुगतान कर पाएंगे।

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