• Sat. Aug 29th, 2026

कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा, माले मुफ्त दिले बेरहम।

BySurendra Jain

Sep 10, 2018

ख़बरपक्की: जिले का एक मात्र कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और कृषि की भलाई के बदले निजी चारागाह में तब्दील हो गया है। प्रति वर्ष केंद्र सरकार के कृषि विभाग से करोड़ो का अनुदान पाने वाला यह केंद्र चाहे तो पूरे मालवा की खेती किसानी को फायदे का धंधा बना सकता है किंतु वर्तमान प्रबंधन ने इस केंद्र को अपनी निजी चारागाह में तब्दील कर दिया है। यही कारण है की केंद्र के लिये मिली 100 बीघा सरकारी जमीन को नवोन्मेषी कृषी कार्यो के लिये न रख कर उसे अपने चहेते किसानों को ओने पौने दामो में नीलाम करना दिखा कर दे दिया जाता है। इस बार भी इस 100 बीघा जमीन में से लगभग 80से 85 बीघा जमीन कुछ हजार रुपयों में नीलाम करना दिखा कर अपने चहेते किसानों को दे दी गई। यही जमीन अगर निजी आदमी किसी को खेती के लिये देता है तो इतनी जमीन के लिये कोई भी किसान 4 से 5 लाख रुपये आराम से दे देता है। जबकि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा फार्म मैनेजर की पोस्ट इस हेतु स्वीकृत है और केंद्र के प्रबंधको ने इस हेतु D.R. पचौरी को फार्म मैनेजर के पद पर नियुक्त कर रखा है यही नही फार्म मैनेजर के लिये फार्म पर आवास का निर्माण भी लाखों रुपए खर्च कर किया गया हैउसके बावजूद फार्म (खेतों) को नीलाम करना यह दर्शाता है कि वर्तमान प्रबंधन केंद्र के संचालन में सक्षम नही है और उसे खेती किसानी में नवीन प्रयोग कर इसे क्षेत्र के किसानों के लिये लाभदायक बनाने की जगह अपने निजी आर्थिक हितों की चिंता है वह भी सरकारी जमीन और सरकारी अनुदान के दम पर। केंद्र की जमीन को बगैर नियम कायदों के नीलाम करवाने की जांच जिला कलेक्टर को करवाना चाहिए की कृषि विज्ञान केन्द्र को दी गई जमीन को अपने अनुसंधान के लिये उपयोग में न लेकर नीलाम करवाने के पीछे औचित्य क्या है और केंद्र और प्रबंधन यदि उसका उपयोग अपने अनुसंधान कार्यो के लिए करने में सक्षम नही है तो कलेक्टर को जमीन सहित पूरे केंद्र को किसानों और सरकार के हित मे अपने नियंत्रण में लेने की कार्यवाही करना चाहिए।

error: Content is protected !!