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 3 घण्टे की मेहनत और बच गई 1 कौवे की जान।

BySurendra Jain

Sep 6, 2018

ख़बरपक्की: रतलाम 6 सितम्बर आज जब मानवता लुप्त होती जा रही है आदमी दुर्घटना में घायल तड़पते हुवे मनुष्य को भी तड़पता छोड़ आगे बढ़ जाता है और रुकने की जहमत नही उठाता है ऐसे में यदि कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति 3 घण्टे एक कौवे की जान बचाने में लगा देता है तो इसे आप क्या कहेंगे दया और करुणा की यह मिसाल पेश की स्वभाव व पेशे में कड़क मिजाजी के लिये जाने जानेवाले अभिभाषक अमित पांचाल ने। जी हाँ आज सुबह साढ़े दस बजे के लगभग अमित पांचाल के घर से थोड़ी दूर अजंता टाकीज के पास बने सरकारी क़वार्टर के सामने एक युकेलिप्टस के पेड पर चायना मांझे में एक कौवे के फंसे होने की सूचना उन्हें मिली उन्होंने फायर बिग्रेड,वन विभाग, आदि को सूचित किया लेकिन जब कही से इंसानी करतूतो के कारण लगभग 16 घण्टे से जिंदगी के लिये जूझ रहे कौवे के लिये उन्हें मदद नही मिली तो अमित पांचाल ने एक आदिवासी से कौवे को बचाने के लिये पेड़ पर चढ़ने की गुजारिश की और उसे 200 रुपये दिये पेड़ की ऊंचाई बहुत अधिक होने से बड़ी मुश्किल से उस आदिवासी ने बांस के सहारे डोर को खींच कर कौवे को नीचे लाये इतनी देर में पशु सेवा करने वाले निगम कर्मचारी शैलेन्द्र गोठवाल भी आ चुके थे उन्होंने और पांचाल ने मिल कर कौवे के पैर में उलझे हुवे चायना धाँगे को कैंची से कांटा उसे दवाई पिलाई फिर उसको पानी पिलाया और दूध रोटी खिलाई 16 घण्टे से लटके रहने और भूखा रहने के कारण कौवा काफी कमजोर हो गया था। जब तक उसमे उर्जा का संचार होकर वह उड़ नही गया तब तक अमित पांचाल और उसके परिवार के लोग उस कौवे की सेवा करते रहे इस दरम्यान अजाक थाना प्रभारी प्रेमपाल चौधरी और आस पास के अनेक लोग इकट्ठा हो गए थे। सभी लोगो ने पांचाल के इस दया भाव और करुणा की तारीफ की। पूर्व में कुछ साल पहले पांचाल इसी तरह एक उल्लू की जान भी बचा चुके हैं।

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