• Fri. Aug 28th, 2026

लाचार पुलिस, बेबस प्रशासन, खूंटी पर कानून यह कैसा शक्ति प्रदर्शन।

BySurendra Jain

Aug 9, 2018

खबर पक्की: आजकल हर समाज हर वर्ग कानून को तोड़ कर अपना शक्ति प्रदर्शन करने में लगा हुआ है शायद उन्हें लगता है की भारी भीड़ अधिकाधिक गाड़िया हथियारो का प्रदर्शन दूसरे समाज के लोगो पर उनकी धाक छोड़ेगा। अपनी धाक जमाने के इसी क्रम में हर समाज की रैली में ज्यादा से ज्यादा लोगो को लाकर ज्यादा गाड़िया ज्यादा तामझाम की होड़ लगी हुई है।विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज की आज निकली रैली से इस बात को और बल मिला है। रैली में DJ की मनाही के बावजूद दर्जनो की तादाद से ज्यादा गाड़ियों में फूल आवाज में बजता DJ संगीत,हथियारों की इजाज़त नही होने के बावजूद हाकी ,डंडे,तलवारो का खुलेआम प्रदर्शन अपनी कहानी खुद बयां कर रहा था।पुलिस और प्रशासन बिल्कुल लाचार और बेबस नजर आ रहा था ऐसे में एक छोटी सी चिंगारी को भी दावानल बनते कितनी देर लगती है। हर समाज अपनी रैली को अत्यधिक भव्य और भीड़भरा दिखाने का भरसक प्रयत्न करता है जिससे दूसरे समाज पर उसकी धाक स्थापित हो यही आदिवासी समाज ने आज की रैली में किया लेकिन हर समाज यह भूल जाता है की उनके इस शक्ति प्रदर्शन से देश का कीमती समय,संसाधन और ऊर्जा का कितना अपव्यय हो रहा है इससे भले ही उस समाज की ताकत पता चलती है लेकिन एक दूसरे को दिखाने के लिए किये जाने वाले इन शक्ति प्रदर्शनो से देश कमजोर होता है कानून का राज कमजोर होता है लोकतन्त्र कमजोर होता है इसलिए हर समाज को इन शक्ति प्रदर्शन के पूर्व सोचना चाहिए की मेरे इस काम से देश की ताकत, कानून की ताकत और लोकतंत्र की ताकत बढ़ रही है या घट रही है हम देश और दुनिया को क्या संदेश देना चाह रहे है एक कानून का पालन करने वाले सशक्त सफल लोकतन्त्र है या की कानून का मखोल उड़ाने वाले भीड़तंत्र फैसला आप और हमको ही करना है क्योंकि यह देश हमारा है साथ ही देश भक्ति जन सेवा और कानून का पालन कराने वाले पुलिस और प्रशासन को भी आत्म विवेचना करना चाहिए की आखिर कानून तोड़ने वालों की भीड़ के आगे वे इतने बेबस क्यो हो जाते हैं क्योंकि कुछ ऐसा हो जाता है जो नही होना चाहिए तो आखिर में बलि का बकरा उन्हें ही बनना है।

error: Content is protected !!