खबर पक्की :मालवा का एक शांत और सहनशील शहर रतलाम जिसने आज तक अपनी दुर्गति की शिकायत किसी से भी नहीं की ७० सालो में इस शहर पर जो भी अत्याचार होते रहे यह शहर चुपचाप सहन करता रहा , पानी की समस्या में उलझे हुए लोग हो या सड़क के गड्डो से लड़ते हुवे लोग , यहाँ की सहनशील जनता ने कभी उफ्फ भी नहीं किया . .अब इस भोली भाली जनता को मिनी स्मार्ट सिटी के नाम का नया लड्डू पकड़ाया है, गौरतलब है मिनी स्मार्ट सिटी और मिनी स्कर्ट में कोई ज्यादा फर्क नहीं है , यानी शादी पार्टी में चकपक होकर जाने वाले आदमी ने ऊपर तो कोट टाई पहन रखे है पर पैरों में चप्पल ही पहन रखे है
इन भारी अतिक्रमण वाली रोडों पर से सिटी बस का संचालन वैसी ही परिकल्पना है जैसे खेतो से हवाई जहाज उड़ेंगे ,
अगर वास्तव में रतलाम को स्मार्ट सिटी बनाना है तो निगम के मुखियाओं को अपने राजनैतिक लाभ हानि की चिंता ना करते हुए एक तरफ से सफाई करना चाहिए , जब तक गलियों में तब्दील हो चूंकि 15 फिट की सड़कों को 60,80और 100 फिट की नही किया जाये बगैर पार्किंग के चल रहे तमाम मैरिज हाल होटल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को पार्किंग व्यवस्था होने तक बंद नही किया जाए तब तक सारी कवायद व्यर्थ है इंदौर की महापौर इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण है जिसने शहर के लिए इतनी हिम्मत दिखाई ,
ऐसी ही हिम्मत अगर रतलाम की महापौर और यहा की जनता दिखा दे तो यह शहर मिनी स्मार्ट नहीं पूर्ण स्मार्ट बन जाएगा जब तक महापौर, विधायक, सांसद और जिला प्रशासन, और पुलिस प्रशासन के सारे सुर एक सुर में नही सधगे तब तक यह सब हवाई कल्पना ही रहने वाला है।
बगैर तैयारी और दूरदृष्टि के मिनी स्मार्ट सिटी की घोषणा, कही चुनावी छलावा तो नही।
