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गुरू पूर्णिमा पर्व संकल्प, समर्पण और आत्मप्रकाश का संदेश देता है : व्यास, समन्वय परिवार का गुरू पूर्णिमा उत्सव

BySurendra Jain

Jul 29, 2026

खबर पक्की, 29 जुलाई, रतलाम। गुरु केवल ज्ञान का उपदेशक नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार से आत्मप्रकाश की ओर ले जाने वाला वह दिव्य आलोक है, जिसके प्रति पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और विश्वास के साथ कर्म, ज्ञान और भक्ति के पथ पर अग्रसर होकर ही मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। आज का पावन पर्व इसी संकल्प, साधना और आत्मोन्नयन का संदेश देता है।
ये विचार प्रभु प्रेमी संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात चिंतक कैलाश व्यास ने समन्वय परिवार, रतलाम द्वारा रामबाग हनुमान मंदिर, पर आयोजित गुरू पूर्णिमा उत्सव में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। इस मौके पादूका पूजन एवं प्रार्थना सत्संग का आयोजन हुआ। इसमें मुख्य वक्ता श्री व्यास, समन्वय परिवार के अध्यक्ष अशोक आप्टे, शैलेन्द्र डागा, माधव काकानी, शिवराम शर्मा, हेमंत चोरमा, जितेंद्र वाघेला, कालूराम पाटीदार, वालजी भाई, श्याम बोरकर आरडीए अध्यक्ष मनोहर, पोरवाल, उपाध्यक्ष गोविंद काकानी मोहनलाल भटट, बजरंग पुरोहित, सुरेन्द्र सुरेखा, हरीश सुरोलिया, राघवजी केबी व्यास, सुनील लाठी, मुकेश शुक्ला, सुनील सोनी रथिन व्यास आदि गुरूभक्तोंं ने पादूका पूजन किया।
श्री व्यास ने इस मौके पर कहा कि सभी स्वयं को सौभाग्यशाली मानें कि हमें भारत माता मंदिर के संस्थापक, पद्मभूषण से सम्मानित, पूर्व शंकराचार्य एवं महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद जी के प्रत्यक्ष दर्शन एवं सान्निध्य का अमूल्य अवसर प्राप्त हुआ। उनका प्रत्येक उद्बोधन शास्त्र सम्मत होने के साथ-साथ मानव जीवन के व्यवहारिक पक्ष को स्पर्श करता था। उनकी ओजस्वी, विद्वत्तापूर्ण और हृदयग्राही वाणी केवल श्रोताओं के मन को ही नहीं, बल्कि उनके जीवन को भी नई दिशा प्रदान करती थी।
श्री व्यास ने स्वामी सत्यमित्रानंद जी के जीवन के अनेक प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व अनुशासन, सहजता, करुणा और सतत आत्मोन्नयन का सजीव उदाहरण था। वे जो कुछ कहते थे, उसे स्वयं अपने जीवन में अक्षरश: चरितार्थ भी करते थे। कथनी और करनी की ऐसी अद्भुत एकरूपता ही उन्हें युगदृष्टा संतों की श्रेणी में प्रतिष्ठित करती है।
उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद जी समन्वय, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना के ऐसे प्रकाश-पुंज थे, जिनका जीवन आने वाली अनेक पीढिय़ों तक मानवता का पथ आलोकित करता रहेगा। उनका आदर्श हमें निरंतर यह प्रेरणा देता है कि जीवन का वास्तविक उत्कर्ष केवल बाह्य उपलब्धियों में नहीं, बल्कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर आत्मिक उन्नयन और लोकमंगल के लिए समर्पित जीवन जीने में निहित है। आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल ने इस मौके पर सैलाना बस स्टैंड स्थित श्री अखण्ड ज्ञान आश्रम में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री विशोखानंद भारती जी महाराज के सानिध्य में आयोजित चैमासा के कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने सभी गुरूभक्तों ने इन कार्यक्रमों में शामिल होनें का आव्हान किया।

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