खबर पक्की : 09 जनवरी रतलाम, रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह द्वारा 7 जनवरी को तहसीलदारों की मीटिंग में। मौखिक रूप से तहसीलदारों को यह निर्देश दिया गया कि वर्ष 1956–57 में जो भूमि शासकीय दर्ज रही है, उसका नामांतरण न किया जाए।
गौरतलब है कि इस संबंध में किसी कलेक्टर द्वारा अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है पूर्व कलेक्टर राजेश बाथम के समय भी यही स्थिति थी लेकिन बाद में नामांतरण चालू कर दिए गए थे, लेकिन पुन वर्तमान कलेक्टर के मौखिक निर्देश के बाद तहसील स्तर पर तहसीलदारों द्वारा नामांतरण रोक दिए गए हैं । इसका सीधा असर भूमि के क्रय–विक्रय पर पड़ेगा और वित्तीय वर्ष का समापन होने से रजिस्ट्री से होने वाले राजस्व पर भी असर पड़ेगा और जमीन खरीदार परेशान होंगे।
जिले में बड़ी संख्या में ऐसी भूमिया हैं जो लंबे समय से निजी उपयोग में हैं, लेकिन पुराने राजस्व रिकॉर्ड में कभी शासकीय दर्ज रही हैं। ऐसे मामलों में नामांतरण नहीं होने से खरीदारों को कानूनी उलझनों, आर्थिक नुकसान और अनावश्यक भागदौड़ का सामना करना पड़ सकता है।
राजस्व जानकारों का कहना है कि लिखित आदेश के बिना मौखिक निर्देशों पर रजिस्ट्री नामांतरण रोके जाने की कार्रवाई से जमीन के क्रेता विक्रेता में तनाव की स्थिति पैदा होगी। आमजन की मांग है कि जिला कलेक्टर जबानी जमा खर्च ना करते हुए इस विषय में स्थिति स्पष्ट करे और यदि कोई निर्णय लिया गया है तो उसे लिखित आदेश के रूप में सार्वजनिक किया जाए।
फिलहाल खबर पक्की आम नागरिकों को आगाह करता है कि भूमि क्रय से पहले उसकी पूरी राजस्व जांच कर लें, विशेष रूप से 1956–57 के रिकॉर्ड अवश्य देखें, अन्यथा राजस्व विभाग उसका नामांतरण नहीं करेगा एवं भविष्य में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
