आलोट। पिछले लम्बे समय से क्षेत्र में अवैध उत्खनन का कारोबार खूब फल फूल रहा है। कहने को तो शासन ने अवैध रेत खनन में लगे वाहन मशीन को राजसात करने के नियमो को प्रभावी रूप से लागू कर दिया है। लेकिन सवाल यह है कि इन्हे अमल कराने वाले ही उदासीन हो तो फिर अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा कैसे? क्षेत्र की चम्बल क्षिप्रा और लूनी नदी से अवैध रूप से रेत निकालने का कार्य धड़ल्ले से बेरोकटोक जारी है। ऐसा भी नहीं कि राजस्व अधिकारी इससे अनभिज्ञ हो बल्कि कुछ जागरूक लोगो ने उनका ध्यान आकर्षित भी कराया। परन्तु कोई कार्यवाही नही की गई। हालत यह है कि रेत माफिया दिन हो या रात निडर होकर नदियो से रेत निकालने के लिए जेसीबी मशीने ट्रेक्टर-ट्राली आदि के साथ लगे हुए है अन्य नदियो के साथ क्षिप्रा नदी की हालत तो बहुत खराब कर दी गई। जगह-जगह बड़े बड़े गहरे गड्ढे कर दिये गये है। जो भविष्य के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते है। पर शायद इसकी चिंता किसी को भी नही है। सब उजाडऩे में लगे हुए है। उन्हेल रोड नदी पर बने पुल के नीचे दोनो ओर बन चुके गड्डे भी किसी को दिखाई नही देते है जो पुल के लिए भी खतरा बन सकते है। पूर्व एसडीएम वीरसिह चौहान और लक्ष्मी गामड ने सक्रियता से रेत के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया और बड़ी कार्यवाही भी की परन्तु वर्तमान एसडीएम की उदासीनता के चलते कोई कार्यवाही नही हो रही है। जो चर्चा का विषय बने हुए है। सबसे खतरनाक बात तो शिप्रा नदी पर यह है कि इस नदी पर जिले का सबसे लंबा पुल बन कर तैयार है और अवैध रेत माफीया इस पुल के पिल्लर के आसपास ही भारी मात्रा में जेसीबी मशीनों से अवैध खनन करने में लगे हुवे हे जिससे यह पुल कमजोर हो सकता है कई बार मीडिया ने प्रशासन को खबरो का प्रकाशन करके बताया लेकिन सुस्त पड़े प्रशासन के नुमाइंदों को इससे कोई सरोकार नहीं लगता है। जबसे पूर्व एसडीएम लक्ष्मी गामड़ का यहाँ से तबादला हुआ है तब से क्षेत्र की नदियो की शामत आ गई है। दिन रात यहां अवैध खनन का कारोबार बे रोक टोक जारी है और जिम्मेदार आंखे बंद कर के इस कार्य को मौन स्वीकृति प्रदान कर रहे हैं।
